
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्र सरकार बंद कोयला खदानों की भूमि का वैज्ञानिक तरीके से पुनः उपयोग कर उन्हें पर्यावरण, आजीविका और आर्थिक विकास के लिहाज से उपयोगी परिसंपत्तियों में बदलने की दिशा में काम कर रही है। इस पहल के तहत विकसित डिजिटल टूल ‘सुविकल्प’ को स्कॉच गोल्ड अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार 26 सितंबर को ‘डिजिटल परिचालन दक्षता-आंकड़ा आधारित निर्णय’ श्रेणी में प्रदान किया गया।
केंद्रीय कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) ने ‘सुविकल्प’ नाम से यह डिजिटल टूल विकसित किया है। यह तकनीकी, पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक मानकों के आधार पर बंद खदानों के पुनः उपयोग से जुड़ी परियोजनाओं का मूल्यांकन और उनकी प्राथमिकता तय करने में मदद करता है।
परियोजना के चयन के बाद उसके क्रियान्वयन की रूपरेखा तैयार करने के लिए प्रिज्म (पोस्ट-माइनिंग रिपर्पजिंग इम्प्लीमेंटेशन स्ट्रैटेजी मॉडल) का उपयोग किया जा सकता है। इसमें परियोजना की अवधारणा, क्रियान्वयन के तरीके, उदाहरण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के नमूने, निविदा दस्तावेज और संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाली एजेंसियों की जानकारी उपलब्ध है।
सीसीओ ने खदानों को बंद करने और उनके पुनः उपयोग से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए ‘सुविकल्प संवाद’ वेबिनार शृंखला भी आयोजित की। इसके तहत कुल 12 विषयगत वेबिनार हुए। इनमें रिक्लेम और लाइव्स रूपरेखा, सुविकल्प टूल, परियोजना प्रबंधन इकाई की स्थापना, समुदाय की भागीदारी, पर्यटन एवं गंतव्य विकास, आजीविका के अवसर, वित्तपोषण के तरीके, परित्यक्त खदानों में जलभराव वाले क्षेत्रों के अभिनव उपयोग और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय अनुभवों पर चर्चा की गई।
मंत्रालय के अनुसार इस पहल से कोयला कंपनियों को खदान बंद करने की प्रक्रिया को केवल नियामकीय अनुपालन तक सीमित रखने के बजाय पर्यावरण बहाली, आजीविका सृजन, सामुदायिक विकास और आर्थिक विविधीकरण से जोड़ने में मदद मिली है। इसका उद्देश्य बंद कोयला खदानों को उपयोगी परिसंपत्तियों में बदलना और संबंधित क्षेत्रों के सतत विकास को बढ़ावा देना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर