कौशल विकास को मिलेगी नई रफ्तार, पीएम-दक्ष योजना का पीएमकेवीवाई में हुआ विलय

युगवार्ता    22-Oct-2026
Total Views |

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (हि.स.)। समाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों, सफाई कर्मचारियों और वंचित समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई 'प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही' (पीएम-दक्ष) योजना को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। वर्ष 2024-25 से इस योजना का विलय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की फ्लैगशिप प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के साथ कर दिया गया है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार पीएम-दक्ष योजना के तहत दिए जाने वाले सभी जॉब रोल पहले से ही 'स्किल इंडिया डिजिटल हब' (एसआईडीएच) पोर्टल से लिए जा रहे थे, जो पीएमकेवीवाई के अंतर्गत भी आते हैं। काम के दोहराव को रोकने और कौशल प्रशिक्षु को एक ही मंच पर अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह एकीकरण किया गया है।

पीएम-दक्ष योजना की शुरुआत वर्ष 2020-21 में एक 'सेंट्रल सेक्टर स्कीम' के रूप में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति (एसससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), सफाई कर्मचारियों और वेस्ट पिकर्स को निशुल्क हुनरमंद बनाना था।

इस योजना का क्रियान्वयन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधीन तीन प्रमुख निगमों की ओर से किया गया। इनमें नेशनल शेड्यूल्ड कास्ट्स फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, नेशनल बैकवर्ड क्लासेस फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और नेशनल सफाई कर्मचारी फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन शामिल हैं।

योजना के तहत प्रशिक्षण देने वाले सूचीबद्ध संस्थानों के लिए सख्त नियम तय किए गए थे। इनमें पट्रेनिंग पूरा होने के बाद संस्थान को कम से कम 70 प्रतिशत युवाओं को रोजगार (वेतनभोगी या स्वरोजगार) दिलाना अनिवार्य था। जो संस्थान 70 प्रतिशत प्लेसमेंट का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाते थे, उनकी ट्रेनिंग फीस की अंतिम (तीसरी) किस्त—यानी कुल लागत का 30 प्रतिशत हिस्सा जब्त (पेनल्टी) कर लिया जाता था। तीनों निगमों द्वारा प्रशिक्षित युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण एवं वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती रही है।

योजना ने न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव लाया है। विशेषकर महिलाओं और वंचित वर्गों में आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान और सामाजिक पहचान बढ़ी है। अधिकांश लाभार्थी सीखी गई कुशलता का निरंतर उपयोग कर रहे हैं और दीर्घकालिक आय वृद्धि के प्रति आश्वस्त हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

Tags