क्रूड ऑयल का शॉक: एक्सपर्ट्स बोले- कच्चे तेल में उछाल से बिगड़ा मार्केट सेंटिमेंट

युगवार्ता    22-Oct-2026
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प्रतीकात्मक


नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (हि.स.)। घरेलू शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है। आज लगातार तीसरे कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक कमजोरी के साथ बंद हुए। आज के कारोबार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते सेंसेक्स 460.30 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 73,249.39 के स्तर पर सिमट गया। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 123.70 अंक की कमजोरी दर्ज करते हुए 22,687.65 के स्तर पर बंद हुआ।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज की गिरावट के लिए वैश्विक कारणों के साथ ही घरेलू कारण भी जिम्मेदार रहे। कैपेक्स गोल्ड एंड इनवेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ राजीव दत्ता के अनुसार बाजार को सबसे बड़ा झटका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से लगा है। सऊदी अरब में यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए ताजा हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब तीन प्रतिशत तक उछल कर 112 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के महंगा होने देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, पेंट निर्माताओं और टायर बनाने वाली कंपनियों के शेयरों पर आज लगातार भारी दबाव की स्थिति बनी रही।

इसके साथ ही, रिजर्व बैंक की पिछली मौद्रिक नीति समिति की बैठक के जो मिनट्स अब सामने आए हैं, उन्होंने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय बैंक के सदस्यों ने संकेत दिया है कि महंगाई को काबू में रखने के लिए आने वाले समय में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है। हालांकि उन्होंने आर्थिक विकास की रफ्तार को ध्यान में रखते हुए बहुत ज्यादा आक्रामक कदम उठाने से परहेज करने की बात कही है।

राजीव दत्ता का कहना है कि आज ग्लोबल मार्केट से मिलने वाले संकेत भी काफी कमजोर रहे, जिसने भारतीय निवेशकों का हौसला तोड़ा। एशियाई बाजारों में भारी गिरावट देखी गई, जहां दक्षिण कोरिया, हांगकांग और जापान के शेयर बाजारों में तीन प्रतिशत तक की कमजोरी दर्ज की गई। इसके अलावा, अमेरिकी फ्यूचर्स भी गिरावट के साथ कारोबार करते रहे। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी की वजह से विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भी भारतीय बाजार में शॉर्ट पोजीशंस बना रहे हैं।

घरेलू मोर्चे पर रुपये की कमजोरी ने भी शेयर बाजार पर लगातार दबाव बनाए रखा। शेयर बाजार में मंदी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 पैसे कमजोर होकर 94.50 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में इस उथल-पुथल के बीच निवेशकों की घबराहट को मापने वाला पैमाना, इंडिया वीआईएक्स (इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स) भी करीब छह प्रतिशत उछल कर 16.55 पर पहुंच गया। इंडिया वीआईएक्स की उछाल से भी मार्केट सेंटीमेंट्स कमजोर होते गए।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि निफ्टी के लिए फिलहाल 22,800 के स्तर को पार करना जरूरी है, तभी बाजार में रिकवरी हो पाएगी। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, और निफ्टी 22,500 के स्तर से नीचे फिसला तो बाजार की कमजोरी और बढ़ सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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