संसदों को जनता के अधिक निकट लाने, जीवंत संबंध बनाने का संदेश देगा ब्रिक्स संसदीय फोरम

युगवार्ता    23-Oct-2026
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नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (हि.स.)। ब्रिक्स संसदीय फोरम की अगले सप्ताह होने वाली शिखर बैठक में भारत का संदेश कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में मानव केन्द्रित नवान्वेषण को बढ़ावा देने के साथ दुनिया की सभी संसदों को जनता के नज़दीक जाने और जनता एवं संसदों के बीच जीवंतता भरे प्रगाढ़ संबंध स्थापित करने का होगा ताकि संसदीय प्रणाली की व्यवहार्यता एवं प्रासंगिकता मजबूत बनी रहे।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को यहां कुछ चुनिंदा पत्रकारों से ब्रिक्स संसदीय फोरम के शिखर सम्मेलन के आयोजन के बारे चर्चा करते हुए यह बात कही। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय भू राजनीति में संसदीय राजनय का भी बड़ा महत्व है। सरकारों से इतर सीधे संसदों के प्रतिनिधियों के बीच संवाद उन देशों की जनता के अधिक निकट एवं समीचीन होता है। भारत ने विभिन्न देशों के साथ सतत संसदीय संवाद एवं संपर्क कायम रखने के लिए 64 संसदीय मैत्री समूह गठित किये हैं। इन समूहों ने कूटनीतिक रूप से बहुत ही सराहनीय योगदान दिया है। ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान संसदीय समूहों ने विश्व भर में भारत के पक्ष को बहुत प्रभावी ढंग से पहुंचाया था। इसका अच्छा संदेश गया और उससे वैश्विक मत पर असर पड़ा था। उन्हाेंने यह भी कहा कि भारत इन संसदीय मैत्री समूहों को अधिक सशक्त एवं सक्रिय बनाएगा और जरूरत पड़ने पर नये संसदीय मैत्री समूह भी गठित करेगा।

ओम बिरला ने कहा कि 12वीं ब्रिक्स संसदीय फोरम में चार विषयों- लचीलापन, नवान्वेषण, सहयोग और सातत्य या स्थायित्व पर चार अलग-अलग सत्रों में चर्चा होगी। पहले दिन तीन सत्र होंगे। पहले सत्र में संस्थागत लचीलापन मजबूत बनाने में संसदों की अहम भूमिका, दूसरे सत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में मानव केन्द्रित नवान्वेषण को बढ़ावा देने में संसदों का उपयोग तथा तीसरे सत्र में अधिक समावेशी वैश्विक शासन व्यवस्था के लिए संसदीय सहयोग की उपयोगिता विषयों पर चर्चा होगी। समापन के दिन चौथे सत्र में हमारे देशों के सतत एवं समावेशी भविष्य सुनिश्चित करने के लिए संसदों की भूमिका विषय पर चर्चा हाेगी। उन्होंने कहा कि आखिरी दिन संयुक्त वक्तव्य जारी किया जाएगा।

संसदीय फोरम के सामूहिक संदेश और भारत के योगदान के बारे में पूछने पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत ने संसदों एवं सदस्यों की क्षमता वृद्धि, उनकी जवाबदेही बढ़ाने, संसद और जनता के बीच निकट का संबंध स्थापित करने, संसद की कार्यवाही में जनता की आकांक्षाएं प्रतिबिम्बित करने आदि के लिए अनेक पहलों को बढ़ावा दिया है और दुनिया की विभिन्न संसदों ने इन्हें देखा एवं अपनाया है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स संसदीय फोरम से दुनिया की सभी संसदों को जनता के नज़दीक जाने और जनता एवं संसदों के बीच जीवंत एवंं प्रगाढ़ संबंध स्थापित करने का संदेश जाएगा।

उन्होंने कहा कि संसदों के बीच संवाद, श्रेष्ठ आचरण को एक-दूसरे से सीखना, वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा, सांसदों की क्षमता वृद्धि, एआई एवं डिजीटल तकनीक का मानव केन्द्रित विकास और संसद का जनता के निकट पहुंच सुनिश्चित करना, ये ऐसे विषय हैं जिनके बारे में अलग-अलग देशों से उनकी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने का आह्वान किया जाएगा।

ओम बिरला ने एक सवाल के जवाब में बताया कि ब्रिक्स संसदीय फोरम शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स के छह सदस्य देश एवं आठ विशेष आमंत्रित देश भाग ले रहे हैं। रूस से सबसे बड़ा शिष्टमंडल आ रहा है। चीन की संसद के डिप्टी स्पीकर आ रहे हैं जो भारत के अगले ब्रिक्स संसदीय फोरम की अध्यक्षता ग्रहण करेंगे। इसके अलावा ईरान के स्पीकर भी आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी देशों के शिष्टमंडल के नेतृत्वकर्ताओं से उनकी द्विपक्षीय बैठक भी होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन बुधौलिया

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