जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग ने निवेशकों को किया निराश, मजबूत शुरुआत के बावजूद घाटे में आईपीओ निवेशक

युगवार्ता    23-Oct-2026
Total Views |
प्रतीकात्मक


नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (हि.स.)। टेक्नोलॉजी बेस्ड प्लेटफॉर्म और मैनेज्ड मार्केटप्लेस संचालित करने वाली कंपनी जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस लिमिटेड के शेयरों ने शुक्रवार को स्टॉक मार्केट में शुरुआत तो बढ़त के साथ की, लेकिन वह इस बढ़त को बरकरार नहीं रख सकी। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 151 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई पर इसकी लिस्टिंग 5 प्रतिशत से अधिक प्रीमियम के साथ 159 रुपये के स्तर पर और एनएसई पर इसकी लिस्टिंग 159.25 रुपये के स्तर पर हुई।

लिस्टिंग के बाद शुरुआती लिवाली के दम पर यह शेयर कुछ ही देर में उछल कर 161 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि इसके बाद बाजार में शुरू हुई भारी मुनाफावसूली और चौतरफा बिकवाली के दबाव के कारण यह शेयर दिन के ऊपरी स्तर से बुरी तरह टूट कर 127.40 रुपये के स्तर तक गिर गया। बाजार में लगातार जारी खरीद-बिक्री के बीच दोपहर 1:15 बजे तक का कारोबार होने के बाद यह शेयर 132.92 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इस तरह शुरुआती बढ़त गंवा देने के कारण कंपनी के आईपीओ निवेशकों को अभी तक के कारोबार में प्रति शेयर 18.08 रुपये यानी 11.97 प्रतिशत का तगड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इस कंपनी का 5,012.33 करोड़ रुपये का आईपीओ 15 से 19 अक्टूबर के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से फीका रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण यह ओवरऑल 2.16 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 4.71 गुना (एक्स एंकर) सब्सक्राइब हुआ था। इसी तरह नॉन-इन्स्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 1.43 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसके अलावा रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन सिर्फ 0.77 गुना और कंपनी के कर्मचारियों के लिए रिजर्व हिस्सा 1.29 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

इस आईपीओ के तहत एक रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 33,20,07,155 शेयर जारी किए गए हैं। इनमें 2,830.43 करोड़ रुपये के 18,74,82,119 नए शेयर जारी किए गए हैं, जबकि 2,181.90 करोड़ रुपये के 14,45,25,036 शेयर ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) विंडो के जरिये बेचे गए हैं। आईपीओ में नए शेयरों की बिक्री से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी मुख्य रूप से अपने पुराने कर्जों को चुकाने, अपनी कुछ सहायक कंपनियों में निवेश करने, रणनीतिक अधिग्रहण के माध्यम से इनऑर्गेनिक ग्रोथ बढ़ाने और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों को पूरा करने में करेगी।

जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेसेज लिमिटेड की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए दस्तावेजों में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कंपनी की वित्तीय सेहत में पिछले तीन वित्त वर्षों के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 917.95 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में सुधरकर 370.71 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी को दोबारा भारी झटका लगा और उसे 1,606.17 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी को 732.98 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हो चुका था।

इस अवधि में कंपनी की राजस्व प्राप्ति में लगातार गिरावट दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 12,523.46 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर 11,492.23 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की कुल राजस्व प्राप्ति में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे यह बढ़कर 16,100.63 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी को 4,195.70 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हो चुका था।

इस दौरान कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में बढ़ोतरी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर कुल 1,232.10 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1,746.55 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ और ज्यादा बढ़कर 1,936.16 करोड़ रुपये हो गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी पर कुल 1,942.19 करोड़ रुपये का बड़ा कर्ज था।

कंपनी की कुल संपत्ति में इस अवधि के दौरान उतार-चढ़ाव देखा गया। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी की कुल संपत्ति 10,330.85 करोड़ रुपये के स्तर पर थी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 10,355.43 करोड़ रुपये हो गई। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की कुल संपत्ति और इजाफे के साथ 13,384.63 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अंत यानी 30 जून 2026 तक कंपनी की कुल संपत्ति मामूली घटकर 12,016.09 करोड़ रुपये दर्ज की गई।

रिजर्व और सरप्लस की बात करें तो कंपनी की स्थिति इस मोर्चे पर काफी कमजोर दिखाई दी है। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 4,025 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 4,355.22 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में घाटे के चलते यह भारी गिरावट के साथ माइनस 15.96 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक यह और गिरकर माइनस 771.23 करोड़ रुपये हो चुका था।

इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में उतार-चढ़ाव का रुख बना रहा। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का नेटवर्थ 4,062.46 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 4,453.76 करोड़ रुपये हो गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का नेटवर्थ बढ़कर 4,813.72 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अंत में कंपनी का नेटवर्थ घटकर 4,094.13 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

इसी तरह कंपनी के ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का ईबीआईटीडीए 97.03 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 322.59 करोड़ रुपये हो गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का ईबीआईटीडीए और उछलकर 421.34 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी का ईबीआईटीडीए 103.16 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है।

-----------

हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

Tags