
काठमांडू, 27 अक्टूबर (हि.स.)। नेपाल के केरुंग से काठमांडू तक प्रस्तावित अंतरदेशीय रेलमार्ग की प्रारंभिक लागत 25,700 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस परियोजना की व्यवहार्यता अध्ययन रिपोर्ट (फिजिबिलिटी स्टडी रिपोर्ट) तैयार हो गई है। परियोजना की रिपोर्ट और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा करने के लिए नेपाल के भौतिक पूर्वाधार मंत्रालय के सचिव पद्म कुमार मैनाली के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल चीन की राजधानी बीजिंग गया है।
मैनाली के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में मंत्रालय के सह सचिव कृष्ण राज पंत, रेल विभाग के वरिष्ठ डिविजनल इंजीनियर कमल कुमार साह सहित विभाग के दो अन्य इंजीनियर हैं। गुरुवार को चीनी पक्ष के साथ औपचारिक बैठक निर्धारित है। बीजिंग में होने वाली बैठक में दोनों देशों के अधिकारी परियोजना को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान चीनी पक्ष नेपाल को अध्ययन रिपोर्ट सौंपेगा।
रेल विभाग के अधिकारियों के अनुसार डीपीआर तैयार करने में करीब दो साल लगने का अनुमान है। रेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक चीन के केरुंग और नेपाल के रसुवा क्षेत्र की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण रेलमार्ग निर्माण पर प्रति किलोमीटर करीब 355 करोड़ नेपाली रुपये खर्च होने का प्रारंभिक अनुमान है। प्रस्तावित रेलमार्ग चीन के केरुंग से नेपाल के रसुवा और नुवाकोट होते हुए काठमांडू के टोखा तक पहुंचेगा। हालांकि, परियोजना की वास्तविक लागत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार होने के बाद ही तय होगी। प्रारंभिक अध्ययन में प्रस्तावित रेलमार्ग के करीब 98 प्रतिशत हिस्से में सुरंगों और ऊंचे पुलों के निर्माण का प्रस्ताव है। शेष हिस्से में पुल और कुछ खुले मार्ग बनाए जाने की योजना है।
रेल विभाग के महानिदेशक हरि कुमार पोखरेल ने कहा कि परियोजना का प्रारंभिक व्यवहार्यता अध्ययन पूरा हो गया है। इस अध्ययन से तकनीकी व्यवहार्यता का आधार मिला है, लेकिन निर्माण लागत, निवेश के ढांचे और तकनीकी मॉडल को निर्धारित करने के लिए आगे और अध्ययन आवश्यक है। नेपाल और चीन के अधिकारियों के बीच गुरुवार को होने वाली द्विपक्षीय बैठक में रिपोर्ट के निष्कर्षों, संभावित लागत, तकनीकी पहलुओं तथा निर्माण और निवेश के मॉडल पर चर्चा होगी। नेपाल के भौतिक पूर्वाधार मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, बैठक में परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर भी निर्णय होने की संभावना है।
मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार केरुंग-रसुवागढ़ी होते हुए काठमांडू तक रेलमार्ग पहुंचाने के लिए प्रस्तावित क्षेत्र में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। इसके बाद परियोजना निर्माण से जुड़े संभावित पर्यावरणीय और प्राकृतिक जोखिमों का अतिरिक्त अध्ययन आवश्यक हो गया है। डीपीआर में भोटेकोशी बाढ़ से जुड़े तकनीकी सवालों, संभावित प्राकृतिक आपदाओं, सुरक्षा उपायों और जोखिम कम करने की रणनीतियों को शामिल करना होगा। व्यवहार्यता अध्ययन पूरा होने के साथ ही केरुंग-काठमांडू रेलमार्ग परियोजना अब आगे के तकनीकी अध्ययन के चरण में प्रवेश कर गई है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अक्टूबर, 2019 में नेपाल यात्रा के दौरान रेलमार्ग के अध्ययन के लिए दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे। इसी यात्रा के दौरान चीन ने काठमांडू-पोखरा-लुंबिनी रेलमार्ग की पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन रिपोर्ट भी नेपाल सरकार को सौंपी थी। चीन की ओर से पहले किए गए पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन के अनुसार केरुंग-काठमांडू रेलमार्ग की लंबाई करीब 72 किलोमीटर प्रस्तावित है। इस मार्ग पर चार स्टेशन बनाने की योजना है। पहला स्टेशन केरुंग में, दो स्टेशन रसुवा और नुवाकोट क्षेत्र में तथा अंतिम स्टेशन काठमांडू के टोखा में प्रस्तावित है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास