मप्र अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0: सुनियोजित और जलवायु अनुकूल शहरी विकास से बनेंगे भविष्य के आदर्श शहर

युगवार्ता    28-Oct-2026
Total Views |
मप्र अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 को संबोधित करते हुए विशेषज्ञ


- चार पैनल चर्चाओं में आधुनिक नगर नियोजन, डिजिटल शहरी शासन, जलवायु अनुकूल विकास और शहरी निवेश की संभावनाओं पर हुआ मंथन

भोपाल, 28 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार बुधवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में ‘मध्य प्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0’ (रोड टू ग्लोबल ग्रोथ समिट 2027) हुई। कॉन्क्लेव में शहरी विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता से 4 महत्वपूर्ण पैनल चर्चाओं (डिस्कशन) का आयोजन किया गया। इन चर्चाओं में सुनियोजित शहरी विकास, आधुनिक अधोसंरचना, डिजिटल तकनीक, जलवायु अनुकूल शहरों के निर्माण, जल सुरक्षा, संसाधन प्रबंधन तथा शहरी निवेश एवं वित्तपोषण की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

महानगरों से आगे पुनर्घनत्वीकरण, टीओडी एवं टीडीआर के माध्यम से शहरी विकास

प्रथम पैनल चर्चा में ‘महानगरों से आगे: पुनर्घनत्वीकरण, ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट एवं ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स के माध्यम से शहरी विकास’ विषय पर मंथन हुआ। पैनल का संचालन हैबिटेट टेक्टोनिक्स आर्किटेक्चर एंड अर्बनिज्म की संस्थापक भागीदार मृगांका सक्सेना ने किया।

पैनल प्रमुख एवं मध्यप्रदेश मेट्रो के प्रबंध संचालक कृष्ण चैतन्य ने कहा कि सुनियोजित विकास के बिना बेहतर जीवन सुविधाओं वाले शहरों का निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने स्वच्छता, हरित ऊर्जा, बेहतर कनेक्टिविटी, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा औद्योगिक एवं आर्थिक कॉरिडोर को शहरी विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। साथ ही टीडीआर नियमों एवं ऑनलाइन टीओडी पोर्टल की जानकारी दी।

नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष विवेक दमानी ने नगर नियोजन में विकासकर्ताओं एवं उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखने तथा परियोजनाओं की समयबद्ध स्वीकृति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की आवश्यकता बताई।

डेला ग्रुप के अध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक जिमी मिस्त्री ने मानव-केंद्रित शहरी विकास पर जोर देते हुए टीओडी, टीडीआर एवं एफएसआई मानकों के अनुरूप एकीकृत मास्टर प्लानिंग और दक्ष आर्किटेक्चर की सहभागिता को आवश्यक बताया।

मेडुला सॉफ्ट टेक्नोलॉजीज के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शांतनु शर्मा ने यातायात की वास्तविक मांग के अनुरूप नगर नियोजन, शहरी घनत्व के बेहतर प्रबंधन तथा लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर जोर दिया।

सीईपीटी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शाश्वत बंद्योपाध्याय ने अधोसंरचना एवं बाजार की मांग के अनुरूप शहरी विस्तार की योजना बनाने, लैंड पूलिंग तथा हितधारकों के लिए सूचनाओं की सुगम उपलब्धता को महत्वपूर्ण बताया।

ईएसआरआई की कंट्री हेड डॉ. रूमा चक्रवर्ती ने जीआईएस आधारित नगर नियोजन पर प्रकाश डालते हुए मध्यप्रदेश शासन के ‘गरुड़ एमपी’ प्लेटफॉर्म, डिजिटल ट्विन तकनीक तथा मास्टर प्लान से भवन निर्माण स्वीकृति तक की प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण पर जोर दिया।

नीति आयोग की कार्यक्रम निदेशक एना रॉय ने शहरी विकास योजनाओं में अभिसरण एवं समन्वय की आवश्यकता बताते हुए मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप लचीले नगर नियोजन पर जोर दिया।

सुधारों एवं डिजिटल सक्षमता के माध्यम से शहरी शासन की पुनर्कल्पना

द्वितीय पैनल चर्चा में ‘सुधारों एवं डिजिटल सक्षमता के माध्यम से शहरी शासन की पुनर्कल्पना’ विषय पर विचार-विमर्श किया गया। इसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-गवर्नेंस, डेटा प्रबंधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नागरिक-केंद्रित सेवाओं के विस्तार पर चर्चा हुई।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव नंदकुमारम ने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट मानक और मान्यता प्राप्त व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने कार्यकुशलता बढ़ाने, सिस्टम थिंकिंग अपनाने तथा शासकीय कार्यप्रणाली को नागरिक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया।

नगरीय विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि प्रौद्योगिकी शहरी शासन में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला रही है। उन्होंने डिजिटल इंडिया के लाभों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए नागरिक-केंद्रित डीपीआई, हब एंड स्पोक मॉडल तथा भविष्य की सायबर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति बनाने की आवश्यकता बताई।

प्रोटियन ई-गवर्न टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के मुख्य बिजनेस एवं प्रोडक्ट ऑफिसर राकेश दोशी ने डिजिटल पहचान, संपत्ति, दस्तावेजों एवं ओपन नेटवर्क सिस्टम की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने सॉफ्टवेयर विकास में लचीलापन तथा नागरिकों, सरकार एवं व्यवसायों के बीच डिजिटल समन्वय को महत्वपूर्ण बताया।

उन्नयन के संस्थापक भागीदार सुहास दत्ता ने डेटा आधारित डिजिटल अधोसंरचना एवं डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से शासकीय विभागों की कार्यक्षमता बढ़ाने तथा नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

योटा इंफ्रास्ट्रक्चर की ज्योति मालदे ने सुदृढ़ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सुरक्षा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी एकीकरण को आवश्यक बताया। मित्रा के संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमन मित्तल ने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रभावी उपयोग से समय, कार्यभार एवं संसाधनों की व्यापक बचत संभव है।

क्रेडाई इंदौर के अध्यक्ष संदीप श्रीवास्तव ने शहरी अधोसंरचना के सुचारू संचालन के लिए डिजिटलीकरण तथा विभागीय जनशक्ति की दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने तकनीकी समस्याओं के त्वरित निराकरण, उपयोगकर्ता अनुकूल सॉफ्टवेयर, समयबद्ध तकनीकी सुधार तथा रियल एस्टेट एवं नगर नियोजन से संबंधित सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए समन्वित व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया।

जलवायु अनुकूल शहरों के विकास, जल सुरक्षा एवं चक्रीय अर्थव्यवस्था पर मंथन

तृतीय पैनल चर्चा में ‘जलवायु अनुकूल शहरों का निर्माण, जल सुरक्षा एवं चक्रीय अर्थव्यवस्था’ विषय पर विचार-विमर्श किया गया। सत्र में पर्यावरण अनुकूल शहरी अधोसंरचना, जल संसाधनों के संरक्षण, ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं संसाधनों के पुनर्चक्रण पर विशेष जोर दिया गया।

सत्र में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप शहरी विकास की आवश्यकताओं, जल सुरक्षा सुनिश्चित करने, अपशिष्ट के पुनः उपयोग तथा संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने जल संरक्षण, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधनों के पुनर्चक्रण एवं विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय को पर्यावरण अनुकूल और सतत शहरी विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

सहभागिता एवं वैश्विक विशेषज्ञता के माध्यम से शहरी निवेश को बढ़ावा

चतुर्थ पैनल चर्चा में ‘सहभागिता एवं वैश्विक विशेषज्ञता के माध्यम से शहरी निवेश को बढ़ावा’ विषय पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें शहरी अधोसंरचना के वित्तपोषण, सार्वजनिक-निजी भागीदारी, म्युनिसिपल बॉन्ड, वैश्विक निवेश एवं आधुनिक वित्तीय संसाधनों के उपयोग पर चर्चा की गई।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पॉलिसी हेड सूरज मोहन ने म्युनिसिपल बॉन्ड मार्केट, अधोसंरचना वित्तपोषण, पूल फाइनेंसिंग एवं शहरी विकास से जुड़ी वित्तीय चुनौतियों पर अपने विचार रखे।

भारतीय वित्त निगम के प्रिंसिपल इन्वेस्टमेंट ऑफिसर एवं सेक्टर लीड नीरज गुप्ता ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल एवं पूल्ड लिस्टेड बॉन्ड की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने में इनकी उपयोगिता बताई।

नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर सैमुअल जोसेफ ने मध्यप्रदेश को निवेश की दृष्टि से संभावनाओं वाला राज्य बताया। उन्होंने परियोजनाओं की बेहतर वित्तीय एवं तकनीकी तैयारी, क्रेडिट रेटिंग में सुधार तथा पूल्ड बॉन्ड के माध्यम से संसाधन जुटाने पर जोर दिया।

कुआलालंपुर स्थित ब्लेन रॉबर्ट डिजाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ब्लेन रॉबर्ट ने भारत की युवा शक्ति एवं विकास की व्यापक संभावनाओं की सराहना की। उन्होंने भारतीय युवाओं के साथ सहभागिता तथा उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से विकास के नए अवसर सृजित करने की इच्छा व्यक्त की।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र कुमार मिश्र ने कहा कि मध्यप्रदेश की बेहतर नीतियां, सिंगल विंडो सिस्टम, सुदृढ़ अधोसंरचना, जल उपलब्धता, कुशल जनशक्ति एवं उन्नत लॉजिस्टिक्स सुविधाएं निवेशकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मध्यप्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 की चारों पैनल चर्चाओं में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के शहरों के निर्माण के लिए सुनियोजित नगर नियोजन, आधुनिक परिवहन व्यवस्था, डिजिटल शहरी शासन, पर्यावरणीय स्थिरता एवं सुदृढ़ वित्तीय संसाधनों का समन्वय आवश्यक है। चर्चाओं में टीओडी एवं टीडीआर आधारित शहरी विकास, नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाओं, डेटा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी उपयोग, जल संरक्षण, अपशिष्ट पुनर्चक्रण, सार्वजनिक-निजी भागीदारी तथा वैश्विक निवेश की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया गया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

Tags