संयुक्त राष्ट्र, 28 अक्टूबर (हि.स.)। भारत ने क्यूबा पर अमेरिका के आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया। भारत ने कहा कि ऐसे कानूनों और नियमों का विरोध किया जाना चाहिए, जिनका दूसरे देशों की संप्रभुता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और जो उनकी जनता की प्रगति तथा समृद्धि में बाधा बनते हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर सौम्या नायर ने महासभा में कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप ऐसे कानूनों एवं उपायों को वापस लेने और अमान्य करने की अपील दोहराता है। उन्होंने कहा कि भारत का बहुपक्षवाद के प्रति विश्वास इस सिद्धांत पर आधारित है कि अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान संवाद और कूटनीति से निकाला जाना चाहिए।
भारत ने उम्मीद जताई कि क्यूबा पर लगा प्रतिबंध जल्द हटाया जाएगा, ताकि वहां के लोगों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग में अधिक भागीदारी और विकास की आकांक्षाओं को पूरा करने का अवसर मिल सके।
नायर ने प्रतिबंधों के कारण क्यूबा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ रहे असर का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, देश में आवश्यक दवाओं की 60 प्रतिशत से अधिक की कमी है, जबकि पिछले पांच वर्षों में खाद्य उत्पादन में 50 प्रतिशत से अधिक गिरावट आई है। ईंधन निर्यात पर हाल में कड़े किए गए प्रतिबंधों से स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, जलापूर्ति, खाद्य वितरण और परिवहन जैसी आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
महासभा में प्रस्ताव 130 मतों के समर्थन, 17 विरोधी मतों और 25 देशों के मतदान से दूर रहने के साथ पारित हुआ।
मतदान से पहले महासभा में अमेरिका और क्यूबा के प्रतिनिधियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष खलीलुर रहमान को कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने एक क्यूबाई राजनयिक को निष्कासित किए जाने की जानकारी दी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता ने सभी प्रतिनिधिमंडलों से महासभा के नियमों और गरिमा का सम्मान करने की अपील की।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय