

नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार समझौता (एफटीए) देश के सभी संवेदनशील हितों की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय किसानों या किसी अन्य हितधारक के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।
पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में आयोजित भारत के औद्योगिक परिवर्तन पर चौथे आईएसआईडी-आईडीआरए राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि समझौते का ब्योरा सार्वजनिक होने पर देश के लोग इसका स्वागत करेंगे। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री कहा कि समझौते की आलोचना कर रहे विपक्षी दलों को इस विषय की समझ और जानकारी नहीं है।
गोयल ने आगे कहा, ‘‘कुछ लोग अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते को राजनीतिक रंग देने की कोशिश करते हैं। इसकी वजह समझ और जानकारी का अभाव है।’’ उन्होंने कहा कि ‘‘इस समझौते का पूरा ब्योरा अभी सामने नहीं आया है। लेकिन मुझे नहीं पता कि वे (विपक्षी दल) किस बात की आलोचना कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है और मैं पूरे दृढ़ संकल्प के साथ यह कह सकता हूं कि जब अमेरिका के साथ व्यापार समझौते का ब्योरा सामने आएगा तो देश के लोग इसका स्वागत करेंगे। हमारे व्यापार या किसी भी पक्ष के किसी संवेदनशील हित से समझौता नहीं किया गया है। इसके उलट, भारत को तुलनात्मक लाभ की मजबूत स्थिति मिलेगी और व्यापार तुलनात्मक लाभ पर ही आधारित होता है।’’
भारत और अमेरिका ने इस साल फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। हालांकि, अमेरिका में शुल्क व्यवस्था में बदलाव के कारण इस समझौते पर अभी आगे बातचीत की जा रही है।
गोयल ने यह भी कहा कि भारत क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते से बाहर हो गया था क्योंकि इससे देश के विनिर्माण क्षेत्र पर गंभीर असर पड़ सकता था। उन्होंने कहा कि भारत ने नवंबर, 2019 में इस बड़े मुक्त व्यापार समझौते में शामिल नहीं होने का फैसला किया था क्योंकि यह उसकी चिंताओं का समाधान नहीं कर रहा था।
आरसीईपी में आसियान के 10 सदस्य देश ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमा, फिलिपीन, सिंगापुर, थाइलैंड और वियतनाम शामिल हैं। इनके अलावा ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड इसके छह मुक्त व्यापार समझौता भागीदार थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर