
उत्तरकाशी, 31 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में केदारताल ट्रेक पर हिमस्खलन के कारण 12 सदस्यीय दल फंस गया। इनमें सात ट्रेकर्स और पांच सहयोगी कर्मचारी शामिल हैं। जिला प्रशासन के अनुसार, चार लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि शेष आठ लोगों की तलाश में बचाव अभियान जारी है। खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण ट्रेकिंग मार्ग अवरुद्ध होने से दल निर्धारित समय पर वापस नहीं लौट सका।
जिला प्रशासन के अनुसार, फंसे हुए लोगों में पश्चिम बंगाल निवासी तपस बाउरी, रतन घोष, मनोज खोवास, रिंटू और उदय घोष तथा उत्तर प्रदेश निवासी वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा शामिल हैं। इनके अलावा उत्तरकाशी निवासी सिद्धार्थ राणा भी फंसे हुए हैं।
वहीं, उत्तरकाशी निवासी रोहन राणा, नेपाल निवासी नयन बहादुर और दीपक सिंह तथा हिमाचल प्रदेश निवासी परचंदा सिंह को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसांई ने बताया कि केदारताल पर फंसे 12 ट्रेकर्स में सात ट्रेकर्स के साथ पांच सपोर्टिंग स्टाफ हैं, जिनमें से चार को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 27 अक्टूबर को गंगोत्री से सात ट्रेकर्स और पांच सपोर्टिंग स्टाफ समेत कुल 12 सदस्य केदारताल ट्रेक के लिए रवाना हुए थे। इनकी वापसी 29 अक्टूबर को निर्धारित थी, लेकिन खराब मौसम, ग्लेशियर और बर्फबारी के कारण रास्ता बंद होने से दल वापस नहीं लौट सका। 30 अक्टूबर को ट्रेकिंग एजेंसी के माध्यम से फोन पर संपर्क होने पर ट्रेकर्स ने कच्ची ढांग के पास स्वयं को सुरक्षित बताते हुए मदद मांगी थी।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि 30 अक्टूबर को ट्रेकिंग एजेंसी ने पोर्टर और गाइड की टीम भेजकर करीब छह किलोमीटर तक रास्ता खोलने का प्रयास किया था। शनिवार को उत्तरकाशी से 10 सदस्यीय एनडीआरएफ टीम सुबह छह बजे गंगोत्री के लिए रवाना हुई। इसके अलावा गंगोत्री से वन विभाग के दो सदस्य, ट्रेकिंग एजेंसी के सात सदस्य और एसडीआरएफ के छह जवानों की टीम भी बचाव अभियान के लिए रवाना की गई।
गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के रेंज अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, कच्ची ढांग के आसपास तीन पोर्टर और एक कुक समेत चार लोग सुरक्षित मिल गए हैं। जबकि भोजखड़क से आगे हिमस्खलन के कारण सात ट्रेकर्स और सपोर्टिंग स्टाफ फंसे हुए हैं। रेस्क्यू टीमें शेष तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। हिमस्खलन से रास्ता बाधित होने के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्द्र नौटियाल