नेपाल : 10 साल की अपहृत बच्ची 37 घंटे बाद बरामद, अपहरण के शक में युवक गिरफ्तार

युगवार्ता    04-Oct-2026
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अपहृत छात्रा के विद्यालय के तरफ से अपहरण की जानकारी डेट हुआ फेसबुक स्टेtas


काठमांडू, 04 अक्टूबर (हि.स.)। नेपाल के रुपन्देही जिला तिलोत्तमा से लापता हुई 10 साल की बच्ची को 37 घंटे बाद पुलिस ने जंगल से सुरक्षित बरामद कर लिया। बच्ची के अपहरण के संदेह में पुलिस ने स्थानीय युवक युवराज थारू उर्फ विशाल को गिरफ्तार किया है।

बच्ची २ अक्टूबर अक्टूबर की रात अपने पांच वर्षीय भाई और दादा-दादी के साथ घर में सो रही थी। रात करीब 3 बजे उसके दादा शौचालय जाने के लिए उठे और बच्चों को कंबल ओढ़ाने गए। इसी दौरान उन्होंने देखा कि 10 साल की बच्ची बिस्तर से गायब है।

इसके बाद दादा ने अपनी पत्नी को जगाया और बच्ची को आवाज लगाकर तलाश शुरू की। परिवार के लोग घर के आसपास खोजबीन करने लगे। शोर सुनकर पड़ोसी भी तलाश में शामिल हो गए। रात में ही मंगलापुर स्थित क्षेत्रीय पुलिस कार्यालय को इसकी सूचना दी गई।

इंस्पेक्टर ज्ञानेंद्र चंद के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर घरों, झाड़ियों, खेतों और आसपास के इलाकों में पूरी रात तलाशी अभियान चलाया, लेकिन बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला।

इसके बाद बुटवल और जिला पुलिस की टीमें भी अभियान में जुट गईं। डीएसपी निशान्त श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने जांच संभाली। प्रांतीय पुलिस नेतृत्व ने अतिरिक्त जवानों के साथ पीआईटी टीम को भी अभियान में लगाया।

पुलिस के उप महानिरीक्षक भूपेंद्र खत्री के मुताबिक, बच्ची की तलाश में करीब 150 पुलिसकर्मी लगाए गए थे।

बताया गया कि बच्ची घटना से एक दिन पहले ही अपने दादा-दादी के साथ भारत से नेपाल लौटी थी। उसके अचानक लापता होने की परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस ने आशंका जताई कि परिवार को जानने वाला कोई व्यक्ति इसमें शामिल हो सकता है।

जांच के दौरान पुलिस का ध्यान स्थानीय युवक युवराज थारू उर्फ विशाल पर गया। पुलिस ने उसके आने-जाने वाले इलाकों, जंगलों, खेतों और तालाबों में तलाश शुरू की। पुलिस को पता चला कि थारू अक्सर जंगल में ही रहता और वहीं खाना खाने के साथ सोता भी था। इसके बाद जंगलों में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया।

करीब 37 घंटे बाद सूचना मिली कि संदिग्ध युवक तिलोत्तमा के चक्रहवा जंगल में हो सकता है। इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से 55 पुलिसकर्मियों की टीम ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया।

हालांकि इस अभियान में थारू नहीं मिला, लेकिन 3 अक्टूबर को दोपहर करीब 3 बजे बच्ची जंगल में अकेली मिली।

पुलिस के अनुसार, बच्ची ऐसी हालत में मिली कि वह बोलने की स्थिति में नहीं थी। उसे तत्काल सुरक्षित निकालकर लुंबिनी प्रांतीय अस्पताल ले जाया गया। बाद में उसे बुटवल स्थित क्षेत्रीय पुलिस कार्यालय द्वारा संचालित सुरक्षित आवास में रातभर रखा गया और आज रविवार को परिजनों को सौंप दिया गया।

इस बीच संदिग्ध अपहरणकर्ता फरार था। पुलिस ने उसकी तलाश जारी रखी और 4 अक्टूबर की सुबह तिलोत्तमा-17 के दरखसवा में एक धान के खेत से उसे पकड़ लिया।

पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान उसके घुटने के नीचे गोली मारी। घायल थारू का फिलहाल लुंबिनी प्रांतीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने उसके पास से एक चाकू और लोहे की रॉड भी बरामद की है।

पुलिस के मुताबिक, स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि थारू अक्सर जंगल में ही खाना खाता और सोता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि लापता रहने के दौरान 37 घंटे तक बच्ची को उसी ने जंगल में अकेले रखा था।

पुलिस ने कहा है कि बच्ची के अपहरण के पीछे की पूरी वजह और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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