
कुल्लू, 07 अक्तूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे के दूसरे दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को समुद्र तल से 10 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित 9.02 किलोमीटर लंबी अटल टनल का दौरा किया। इस दौरान हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता और लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी उनके साथ मौजूद रहीं।
अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने राष्ट्रपति का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री एवं मंत्री-इन-वेटिंग राजेश धर्माणी, सांसद कंगना रनौत, लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा, उपायुक्त किरण भड़ाना सहित जिला प्रशासन और सेना के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। राजेश धर्माणी ने राष्ट्रपति को स्मृति चिह्न भी भेंट किया।
इस अवसर पर राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने अटल टनल को इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का विश्वस्तरीय उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस टनल ने लाहौल-स्पीति को देश के अन्य हिस्सों के काफी करीब ला दिया है। यह परियोजना भारत की तकनीकी क्षमता, दूरदृष्टि और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
राज्यपाल ने कहा कि अटल टनल आधुनिक बुनियादी ढांचे और रणनीतिक विकास की शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है। यह इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि देश कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा करने में सक्षम है। ऐसी परियोजनाएं न केवल आवागमन को सुगम बनाती हैं, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में विकास और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करती हैं।
दौरे के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अटल टनल की इंजीनियरिंग विशेषताओं और निर्माण कार्य में गहरी रुचि दिखाई। अधिकारियों ने उन्हें टनल के तकनीकी पहलुओं और निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। राष्ट्रपति ने आसपास के हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद लिया।
इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने मनाली के डूंगरी स्थित प्रसिद्ध हिडिंबा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की और मत्था टेका। उन्होंने देशवासियों की शांति, समृद्धि, सुख और कल्याण की कामना की। राष्ट्रपति की मंदिर यात्रा हिमाचल की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी परंपराओं को भी दर्शाती है।
वहीं, राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने मनाली स्थित फॉरेस्ट रेस्ट हाउस का दौरा कर पौधारोपण गतिविधि में भाग लिया। उन्होंने दुर्लभ प्रजाति के ‘जिन्कगो बिलोबा’ का पौधा लगाया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा का संदेश देते हुए कहा कि प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में सतत विकास को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / जसपाल सिंह