ब्याज दर में बढ़ोतरी से महंगा होगा लोन, बढ़ जाएगा ईएमआई का बोझ

युगवार्ता    07-Oct-2026
Total Views |
प्रतीकात्मक


नई दिल्ली, 07 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने देश में महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का बड़ा निर्णय लिया है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25 प्रतिशत) का इजाफा कर दिया है, जिसके बाद देश में कर्ज लेना पहले की तुलना में अधिक महंगा हो जाएगा। परेशानी यह है कि ब्याज दरों में तत्काल कटौती की संभावना भी नहीं है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना से साफ इनकार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि रिजर्व बैंक का अगला कदम आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई के रुख के आधार पर या तो दरों में और बढ़ोतरी करना होगा या फिर इन्हें इसी स्तर पर थामे रखना होगा। इस फैसले के बाद बैंक धीरे-धीरे ब्याज दरों में बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर डालना शुरू करेंगे, जिससे आम उपभोक्ताओं के मासिक बजट में बदलाव आना तय है।

टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक के इस कदम का सबसे सीधा और बड़ा असर उन होम लोन धारकों पर पड़ने जा रहा है, जिन्होंने फ्लोटिंग रेट पर कर्ज लिया है। ऐसे कर्ज सीधे तौर पर एक्सटर्नल बेंचमार्क यानी रेपो रेट से जुड़े होते हैं। ब्याज दरों में इस बढ़ोतरी के बाद बैंकों से मिलने वाले होम लोन की दरें बढ़ जाएंगी। इसकी वजह से या तो ग्राहकों को हर महीने चुकाई जाने वाली किस्त (ईएमआई) की राशि बढ़ानी होगी या फिर उनके कर्ज की अवधि (लोन टेन्योर) लंबी हो जाएगी।

तारकेश्वर नाथ वैष्णव के अनुसार मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमत में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया के हालात को देखते हुए रिजर्व बैंक ने महंगाई को काबू में रखने के उद्देश्य से यह सख्त कदम उठाया है। वैष्णव का ये भी कहना है कि ब्याद दर में की गई बढ़ोतरी से त्योहारी सीजन के दौरान रियल एस्टेट मार्केट में चल रही मजबूत मांग और खरीदारों के उत्साह पर कोई खास नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा लेकिन त्योहारी सीजन खत्म होने के बाद रियल एस्टेट सेक्टर बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की यह बढ़ोतरी मध्यम वर्ग की जेब पर अच्छा-खासा असर डाल सकती है। तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने 25 साल की अवधि के लिए 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है तो ब्याज दर में इस मामूली वृद्धि के कारण उसकी मासिक ईएमआई करीब 816 रुपये तक बढ़ सकती है।

लोन की पूरी अवधि के दौरान इस बढ़े हुए पैसे का कुल बोझ देखें तो ग्राहक को करीब 2.45 लाख रुपये का अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ेगा। इसी तरह 30 लाख रुपये के लोन पर मासिक ईएमआई करीब 490 रुपये और 40 लाख रुपये के लोन पर लगभग 654 रुपये की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत, जो ग्राहक अपनी मासिक ईएमआई की राशि में कोई बदलाव नहीं करना चाहते हैं, उनके लिए कर्ज चुकाने की अवधि करीब 22 महीने और बढ़ जाएगी, जिससे उनका 25 साल का लोन लगभग 27 साल में जाकर पूरा होगा।

इस फैसले के बाद अलग-अलग तरह के ग्राहकों पर अलग-अलग असर दिखेगा। फ्लोटिंग रेट वाले ग्राहकों को अपने लोन के रीसेट साइकिल के पूरा होते ही इस बढ़े हुए बोझ का अहसास होने लगेगा। हालांकि बैंक ग्राहकों को यह विकल्प दे सकते हैं कि वे अपनी सहूलियत के हिसाब से मासिक किस्त की राशि बढ़ाएं या कर्ज की अवधि को लंबा करें।

दूसरी ओर, जिन लोगों ने फिक्स्ड रेट यानी स्थिर ब्याज दर पर पहले से होम लोन लिया हुआ है, उनकी मौजूदा ईएमआई पर कोई तत्काल असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, यदि वे भविष्य में अपने लोन को रीफाइनेंस कराने की सोच रहे हैं या बाजार से नया कर्ज लेने जा रहे हैं, तो उन्हें अब पहले के मुकाबले अधिक ऊंची दरों पर ब्याज चुकाना होगा।

जानकारों का कहना है कि रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद बैंकों के लिए फंड की लागत बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर होम लोन की तरह कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों पर भी पड़ेगा। नए लोन महंगे हो जाएंगे और मौजूदा फ्लोटिंग रेट लोन की ईएमआई या लोन की अवधि बढ़ जाएगी। दूसरी तरफ, बचतकर्ताओं और विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह अच्छी खबर है। बैंक अपनी लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट और बचत खातों पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं, जिससे जमा पूंजी पर अधिक रिटर्न मिल सकेगा।

तारकेश्वर नाथ वैष्णव का ये भी कहना है कि ब्याज दर बढ़ने से बैंकिंग प्रणाली में क्रेडिट ग्रोथ (लोन की मांग) में थोड़ी सुस्ती आ सकती है क्योंकि लोन महंगे होने से लोग कर्ज लेने में सावधानी बरतेंगे। हालांकि, एफडी पर आकर्षक ब्याज मिलने से बैंकों के पास जमा पूंजी का प्रवाह बढ़ सकता है। ऐसे में बैंकों को अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (एनआईएम) को संतुलित रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी।

भारतीय रिजर्व बैंक का यह कदम मुख्य रूप से 5.2 प्रतिशत की अनुमानित महंगाई दर को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है। ऐसा करके बाजार में नकदी के प्रवाह को कम करके मांग को नियंत्रित किया जाएगा, जिससे बढ़ती कीमतों पर लगाम लगेगी। हालांकि, ऊंची ब्याज दरों से कंपनियों की विस्तार योजनाएं महंगी हो सकती हैं, जो आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को थोड़ा धीमा कर सकती हैं। इसके बावजूद, रिजर्व बैंक को भरोसा है कि देश का आर्थिक इंजन मजबूत है इसीलिए उसने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.1 प्रतिशत रखा है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

Tags