‘धर्म पर टैक्स’ वाले ट्वीट पर घिरे विवेक अग्निहोत्री

युगवार्ता    07-Oct-2026
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नैनीताल का प्रसिद्ध कैंची धाम।


कैंची धाम में सप्ताहांत पर वाहनों के जाम की ऐसी रहती है स्थिति।


विनोद बंसल और  विवेक अग्निहोत्री


विनोद बंसल ने कहा- करोड़ों हिंदुओं की तीर्थयात्रा को ‘चमत्कार की प्रतीक्षा’ बताना गलत; सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं, अग्निहोत्री से बयान वापस लेने की मांग

नई दिल्ली, 07 अक्टूबर (हि.स.)।कैंची धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को लेकर फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की टिप्पणी अब सोशल मीडिया की बहस से निकलकर व्यापक सार्वजनिक विवाद में बदल गई है।

दर असल, चार अक्टूबर को नीम करौली बाबा के कैंची धाम में उमड़ी भीड़ का वीडियो साझा करते हुए अग्निहोत्री ने लिखा था कि यदि सरकार धर्म पर टैक्स लगा पाती तो भारत रातोंरात दुनिया का सबसे अमीर देश बन जाता। उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि लोग धर्म छोड़कर इनोवेशन, प्रगति, उत्पादकता और नए विचारों पर ध्यान देने लगते तथा चमत्कार या दैवीय हस्तक्षेप की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं अमीर बनने का प्रयास करते।

https://x.com/vivekagnihotri/status/2106956638557200406

इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक आस्था को आर्थिक पिछड़ेपन के साथ जोड़ने वाला तर्क बताया, जबकि कुछ उपयोगकर्ताओं ने अग्निहोत्री की इस बात का समर्थन भी किया कि भारत को विज्ञान, शिक्षा, उत्पादकता और नवाचार पर अधिक ध्यान देना चाहिए, पर इस तरह की टिप्पणी सही नहीं है।

विनोद बंसल ने सीधे पूछा- धर्म और इनोवेशन को आमने-सामने क्यों खड़ा किया?

विवाद में सबसे स्पष्ट और सार्वजनिक आपत्ति विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी विनोद बंसल की ओर से आई। बंसल ने अग्निहोत्री से सवाल किया कि करोड़ों हिंदुओं की तीर्थयात्रा को “चमत्कार की प्रतीक्षा” के रूप में क्यों प्रस्तुत किया जा रहा है और धर्म को इनोवेशन तथा उत्पादकता के विरुद्ध क्यों खड़ा किया जा रहा है। बंसल ने कहा कि तीर्थस्थल भारत की आत्मा हैं। वे केवल पूजा के स्थान नहीं हैं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, सामाजिक जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अग्निहोत्री के “धर्म पर टैक्स” वाले विचार पर भी सवाल उठाया और कहा कि जब फिल्म उद्योग अपनी फिल्मों के लिए टैक्स छूट की मांग करता है, तब तीर्थस्थलों के संदर्भ में “धर्म टैक्स” की बात क्यों की जा रही है।

https://x.com/vinod_bansal/status/2107834450394665172

‘क्या किसी फिल्म के प्रचार ने सोच बदल दी?’

बंसल की प्रतिक्रिया का एक हिस्सा व्यक्तिगत स्तर पर भी काफी तीखा रहा। उन्होंने अग्निहोत्री से सवाल किया कि क्या किसी नई फिल्म के प्रचार ने उनके मन में यह विचार पैदा किया है। उन्होंने कहा कि यही धार्मिक और राष्ट्रवादी हिंदू समाज उनकी फिल्मों की सफलता का आधार बना, जिसने उन्हें आगे बढ़ाया और उनके सार्वजनिक कद को स्थापित किया। बंसल ने यहां तक कहा कि अग्निहोत्री पहले ऐसे नहीं थे और इसलिए यह सवाल उठता है कि क्या किसी ने उन्हें ऐसा कहने के लिए प्रेरित किया। अंत में उन्होंने अग्निहोत्री से अपने शब्दों पर पुनर्विचार करने, बयान वापस लेने और करोड़ों श्रद्धालु हिंदुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए माफी मांगने को कहा है।

सोशल मीडिया पर भी सवाल- धर्म मानने वाला भारतीय क्या प्रगति नहीं करता?

बंसल की प्रतिक्रिया के समानांतर सोशल मीडिया पर आम उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। एक प्रतिक्रिया में एक उपयोगकर्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसी टिप्पणी की अपेक्षा अग्निहोत्री से नहीं थी और इसी कारण वह उन्हें अनफॉलो कर रहा है। इस प्रतिक्रिया पर अग्निहोत्री ने “Thank You” लिखकर जवाब दिया।

https://x.com/vinod_bansal/status/2107693614147195336

दूसरी ओर कुछ उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया कि यदि धार्मिक स्थलों पर जाने वाले लोग ही भारत की आर्थिक प्रगति में बाधा हैं तो देश के वैज्ञानिक, इंजीनियर, उद्यमी और कारोबारी किस समाज से आते हैं? कुछ प्रतिक्रियाओं में यह तर्क दिया गया कि धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक सोच को एक-दूसरे का विरोधी मानना उचित नहीं है।

उल्लेखनीय है कि भारत में धर्म का विविध रूपों में विशाल स्वरूप मिलता है। मंदिर जाना भी धर्म का एक हिस्सा है। वहीं धर्म मनुष्य के जीवन में कर्तव्य, आचरण, सेवा, आत्मसंयम, लोकमंगल और नैतिक व्यवस्था से जुड़ा रहा है। इसी भारतीय परंपरा में कर्मयोग की अवधारणा विकसित हुई है।

https://x.com/DRKAMALKISHOR12/status/2107121762123272599

स्वामी विवेकानंद ने धर्म को समाजसेवा, शिक्षा और मानव उत्थान से जुड़ा हुआ माना है। फिलहाल, अग्निहोत्री की टिप्पणी को लेकर सार्वजनिक बहस जारी है। कैंची धाम में उमड़ी भीड़ के पीछे गांधी जयंती के लंबे सप्ताहांत और नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ के बाद बढ़ी रुचि को भी रिपोर्टों में कारण बताया गया है।विनोद बंसल ने अग्निहोत्री से बयान वापस लेकर माफी मांगने को कहा है, वहीं सोशल मीडिया पर हुई प्रतिक्रियाओं ने इस बहस को और व्यापक बना दिया है।

https://x.com/keFq4fA6N6qMdhZ/status/2106957525186937322

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

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