सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत अपनी सैन्य ताकत को नई धार देने की तैयारी में : रक्षा मंत्री

युगवार्ता    03-Nov-2026
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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह


जैसलमेर, 03 नवंबर (हि.स.)। दुनिया में बदलते युद्ध के तौर-तरीकों और बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत अपनी सैन्य ताकत को नई धार देने की तैयारी में है। अब युद्ध के मैदान में केवल पारंपरिक हथियार ही नहीं, बल्कि ड्रोन, मिसाइल, आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियां और सटीक हमला करने वाली तकनीक भी निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सेनाओं के आधुनिकीकरण और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को सरकार की प्रमुख प्राथमिकता बताया।

रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में देश का रक्षा बजट बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसमें सेनाओं के आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य आधुनिक सैन्य संसाधनों से लैस सेनाओं के साथ घरेलू रक्षा उद्योग को भी मजबूत बनाना है, ताकि भविष्य की चुनौतियों का मुकाबला देश में विकसित तकनीक और उपकरणों से किया जा सके।

राजनाथ सिंह ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और इजराइल-ईरान संघर्ष जैसे घटनाक्रमों ने युद्ध की बदलती प्रकृति को सामने रखा है। आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल और वायु रक्षा प्रणालियों की भूमिका तेजी से बढ़ी है। ऐसे में भारतीय सेनाओं को वर्तमान जरूरतों के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार करना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए सरकार वित्तीय संसाधनों, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता तथा मानव संसाधन और सैन्य संरचनाओं में सुधार पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य केवल नए हथियार खरीदना नहीं, बल्कि सैनिकों की क्षमता, युद्ध की तैयारी और तकनीकी दक्षता को एक साथ मजबूत करना है।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में विकसित की जा रही नई सैन्य संरचनाएं भी बदलती युद्ध प्रणाली की झलक पेश करती हैं। अश्नि ड्रोन प्लाटून का उद्देश्य पैदल सेना को ड्रोन आधारित निगरानी और जानकारी जुटाने की क्षमता देना है। इससे युद्ध क्षेत्र में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और कमांडरों तक जरूरी सूचनाएं तेजी से पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

वहीं, भैरव बटालियन तेजी से कार्रवाई करने वाली विशेष प्रशिक्षित सैन्य इकाइयों के रूप में विकसित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य बदलती परिचालन परिस्थितियों में तेजी से आगे बढ़ना और जरूरत के अनुसार सीमित क्षेत्र में कार्रवाई करना है।

शक्तिबाण रेजिमेंट की अवधारणा तोपखाने की क्षमता को आधुनिक तकनीक से जोड़ने से संबंधित है। इसमें ड्रोन, स्वार्म ड्रोन और लक्ष्य पर सटीक प्रहार करने वाली मानवरहित प्रणालियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इन तकनीकों से दुश्मन के ठिकानों की पहचान और सटीक हमले की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलेगी। रक्षा मंत्री ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन में हुई वृद्धि को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके अनुसार, वर्ष 2014-15 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 46,429 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से लेकर बड़ी कंपनियां तक योगदान दे रही हैं। सरकारी संस्थानों के साथ निजी उद्योगों की भागीदारी भी बढ़ रही है। इससे देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण, तकनीकी क्षमताओं के विकास और स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहन मिल रहा है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी तकनीकी क्षमता बेहद जरूरी है। सरकार ऐसी रक्षा व्यवस्था विकसित करना चाहती है, जिसमें भारतीय सेनाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप उपकरण देश में तैयार किए जा सकें और विदेशी निर्भरता कम हो। रक्षा क्षेत्र में घरेलू कंपनियों की बढ़ती भागीदारी इसी दिशा में अहम मानी जा रही है।

बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और संसदीय परामर्शदात्री समिति के सदस्य मौजूद रहे।

रक्षा मंत्री ने समिति के सदस्यों से आधुनिकीकरण संबंधी प्रस्तुतियों का गंभीरता से अध्ययन करने और अपने सुझाव देने का आग्रह किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि उपयोगी सुझावों पर यथासंभव अमल किया जाएगा।

दौरे के दौरान सोमवार को राजनाथ सिंह ने जैसलमेर स्थित आर्मी कैंट के वॉर म्यूजियम में लाइट एंड साउंड शो देखा। इस दौरान उनके साथ रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ सहित अन्य अधिकारी और समिति के सदस्य मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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