
नई दिल्ली, 05 नवंबर (हि.स.)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सक्रिय अंतरिक्ष मलबा हटाने (एक्टिव डेब्रिस रिमूवल) की दिशा में भारत की उभरती क्षमताएं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में देश के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व और पूरी मानवता के लिए सुरक्षित अंतरिक्ष वातावरण सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2030 तक अंतरिक्ष को मलबा मुक्त बनाने का लक्ष्य लिया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन से वर्चुअल माध्यम से हैदराबाद में कॉसमोसर्व स्पेस की ‘बेस-1’ सुविधा का उद्घाटन किया। गाचीबोवली स्थित वीएसडी टेक पार्क में आयोजित कार्यक्रम में तेलंगाना सरकार के आईटी एवं उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू और कॉसमोसर्व स्पेस के संस्थापक एवं सीईओ डॉ. चिरंजीवी फणींद्र मौजूद रहे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि लगभग 14,800 वर्ग फुट में फैली बेस-1 अत्याधुनिक और व्यापक सुविधा है। यहां अंतरिक्ष रोबोट का डिजाइन, निर्माण और परीक्षण किया जाएगा। साथ ही, मिशन कंट्रोल के माध्यम से इनके संचालन की व्यवस्था भी होगी। इस केंद्र में ऑर्बिटल रेंडेजवस एवं कैप्चर लैब, स्पेस रोबोटिक्स इनोवेशन लैब, माइक्रोग्रैविटी सिमुलेशन प्लेटफॉर्म और सैटेलाइट इंटीग्रेशन क्लीन रूम जैसी विशेष सुविधाएं विकसित की गई हैं। इससे भारत की निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की क्षमताओं को मजबूती मिलेगी।
मंत्री ने कॉसमोसर्व स्पेस की सक्रिय अंतरिक्ष मलबा हटाने और अंतरिक्ष कक्षा में सेवाएं देने (इन-ऑर्बिट सर्विसिंग) के क्षेत्र में की जा रही पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि कंपनी की स्थापना के एक वर्ष के भीतर जुलाई 2026 में मिशन ‘एम्ब्रेस’ के तहत अंतरिक्ष में सॉफ्ट रोबोटिक पेटल्स का परीक्षण किया जाना निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की तेज प्रगति और तकनीकी क्षमता का प्रमाण है। कंपनी की टीम ने इसरो और गगनयान कार्यक्रम से प्राप्त अनुभव को निजी क्षेत्र में सहयोगात्मक मॉडल के रूप में आगे बढ़ाया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों ने देश की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को नए अवसर दिए हैं। करीब पांच-छह वर्ष पहले शुरू हुई सुधार प्रक्रिया और न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) तथा भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) की स्थापना ने देश के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह बदल दिया है।
उन्होंने बताया कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था बढ़कर करीब 9 अरब डॉलर हो गई है। अगले दशक में इसे 40 से 45 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। वहीं, देश में अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप की संख्या पहले इकाई अंक में थी, जो अब बढ़कर करीब 450 हो गई है।
मंत्री ने कहा कि भारत में वैज्ञानिक प्रतिभा और तकनीकी क्षमता की कभी कमी नहीं रही। जरूरत केवल ऐसे अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र की थी, जो युवाओं की प्रतिभा को अवसर दे सके। उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से अंतरिक्ष क्षेत्र में अधिक निवेश करने तथा विज्ञान एवं अनुसंधान के लिए परोपकारी संस्थाओं से भी सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का लक्ष्य तकनीकी आत्मनिर्भरता और अपनी संप्रभु क्षमताओं को मजबूत करने के साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को भी आगे बढ़ाना है। चंद्रयान और गगनयान जैसे कार्यक्रमों ने दिखाया है कि भारत अपेक्षाकृत कम लागत में जटिल अंतरिक्ष मिशनों को अंजाम देने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का लाभ केवल अंतरिक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि गाति शक्ति, स्मार्ट सिटी और आपदा प्रबंधन सहित कई क्षेत्रों में इसके अनुप्रयोग आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बना रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि कॉसमोसर्व स्पेस की पहल ‘विश्व बंधु भारत’ की भावना को दर्शाती है। भारत अंतरिक्ष की स्थिरता और सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ाकर पूरी मानवता के हित में काम कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह की पहल अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत के वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करने के साथ देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को भी बढ़ाएगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वह जल्द ही व्यक्तिगत रूप से इस सुविधा का दौरा कर कॉसमोसर्व स्पेस की टीम से बातचीत करना चाहेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी