विश्व पर्यटन स्थल सांची में 28-29 नवंबर को होगा महाबोधि महोत्सव, देश-विदेश के बौद्ध अनुयायी करेंगे शिरकत

युगवार्ता    05-Nov-2026
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महाबोधि महोत्सव की तैयारियों को लेकर कलेक्टर ने ली अधिकारियों की बैठक


भोपाल, 05 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सांची में आगामी 28 एवं 29 नवम्बर को महाबोधि महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों सारिपुत्र और महामोग्गलायन के पवित्र अवशेषों के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेंगे। देश-विदेश से आने वाले बौद्ध अनुयायी इन पवित्र अवशेषों के समक्ष श्रद्धा अर्पित करेंगे।

महोत्सव के गरिमामय एवं भव्य आयोजन को लेकर रायसेन कलेक्टर रोहित सिसोनिया नेगुरुवार को सांची में बैठक कर विभिन्न विभागों द्वारा की जाने वाली व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा कर संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ सभी तैयारियां समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने बौद्ध स्तूप परिसर का भ्रमण भी किया।

सिसोनिया ने कहा कि सांची महोत्सव में देश-विदेश से बड़ी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु, नागरिक शामिल होते हैं। इसे दृष्टिगत रखते हुए आगंतुकों की सुविधा, सुरक्षा एवं सुगम आवागमन के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, पेयजल, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए, ताकि महोत्सव में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। महोत्सव में शामिल होने वाले प्रत्येक आगंतुक को बेहतर अनुभव मिले, इसके लिए सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित एवं उत्कृष्ट हों। बैठक में जिला पंचायत सीईओ कमल सोलंकी, अपर कलेक्टर मनोज उपाध्याय, महाबोधी सोसायटी से बौद्ध धर्मगुरू और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि सांची में हर साल नवंबर माह के अंतिम शनिवार-रविवार को दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव आयोजित जाता है। यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांची की उस ऐतिहासिक विरासत को करीब से जानने का अवसर भी है, जिसने सदियों से दुनिया को अहिंसा, करुणा और शांति का संदेश दिया है। दो दिनों तक यहां बौद्ध परंपराओं, प्रार्थनाओं और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से आध्यात्मिक वातावरण बनेगा।

सांची में महाबोधि महोत्सव का इतिहास वर्ष 1952 से जुड़ा है। इसकी शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मौजूदगी में हुई थी। तब से यह आयोजन बौद्ध धर्म की विरासत और उसकी शिक्षाओं को दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम बना हुआ है। महोत्सव का आयोजन महाबोधि सोसायटी ऑफ श्रीलंका, सांची केंद्र और मध्य प्रदेश शासन के संयुक्त तत्वावधान में किया जाता है।

महोत्सव की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों सारिपुत्र और महामोग्गलायन के पवित्र अवशेषों के दर्शन कराना है। इन दोनों शिष्यों को बौद्ध धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। इनके अवशेष सांची के स्तूप क्रमांक-3 से प्राप्त हुए थे, जिन्हें बाद में चेतियागिरी विहार में सुरक्षित रखा गया। महोत्सव के अवसर पर इन्हें विशेष धार्मिक अनुष्ठान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए प्रस्तुत किया जाता है। इस अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी बौद्ध अनुयायी सांची पहुंचते हैं।

सांची की पहचान केवल महाबोधि महोत्सव तक सीमित नहीं है। यहां स्थित महान स्तूप विश्व धरोहर सूची में शामिल है। इसका निर्माण मौर्य सम्राट अशोक के काल से जुड़ा है। स्तूप के चारों ओर बने तोरण द्वारों पर भगवान बुद्ध के जीवन, उनके उपदेशों और जातक कथाओं से जुड़ी कलात्मक आकृतियां उकेरी गई हैं। यहां स्तूप क्रमांक-2 और 3, अशोक स्तंभ तथा प्राचीन विहार भी बौद्ध इतिहास की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। सांची की खासियत यह है कि यहां इतिहास केवल पुस्तकों और संग्रहालयों में नहीं, बल्कि पत्थरों पर उकेरी गई कलाकृतियों और प्राचीन स्थापत्य में भी दिखाई देता है। यही वजह है कि यह स्थान देशी-विदेशी पर्यटकों और इतिहास के अध्येताओं को आकर्षित करता है।

महाबोधि महोत्सव के दौरान बौद्ध धर्म की परंपराओं और मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति को सामने लाने का अवसर मिलता है। धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, संगीत, नृत्य और अन्य गतिविधियां इस आयोजन का हिस्सा रही हैं। इससे सांची आने वाले पर्यटकों को बौद्ध दर्शन के साथ भारतीय सांस्कृतिक विविधता को समझने का अवसर मिलता है। भोपाल से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सांची सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां का बौद्ध विहार, स्तूप परिसर और बुद्ध जम्बूद्वीप पार्क पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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