काठमांडू में बढ़ा वायु प्रदूषण, कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता 'अस्वास्थ्यकर' स्तर पर पहुंची

युगवार्ता    06-Nov-2026
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काठमांडू में वायु प्रदूषण के कारण धुंध


काठमांडू, 06 नवंबर (हि.स.)। नेपाल में शुष्क मौसम की शुरुआत के साथ ही काठमांडू घाटी में वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। आज घाटी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता अस्वास्थ्यकर स्तर पर पहुंच गई ।

स्विट्जरलैंड स्थित वायु गुणवत्ता निगरानी संस्था आईक्यूएआईआर के अनुसार, शुक्रवार सुबह घाटी के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर अस्वास्थ्यकर बना रहा। गुरुवार को भी स्थिति ऐसी ही थी। पूर्वानुमान के मुताबिक, रविवार तक हवा की गुणवत्ता इसी स्तर पर रहने की आशंका है।

आईक्यूएआईआर के अनुसार, आज सुबह काठमांडू घाटी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 111 दर्ज किया गया। गुरुवार को काठमांडू के बानेश्वर इलाके में एक्यूआई का स्तर 153 तक पहुंच गया था। शुक्रवार सुबह 9 बजकर 15 मिनट तक इसी इलाके में यह घटकर 127 पर आ गया।

काठमांडू महानगरपालिका के वायु गुणवत्ता निगरानी डैशबोर्ड के अनुसार, स्वयंम्भू, बालाजू, टेकु, डल्लू, थापाथली, क्षेत्रपाटी, जडीबुटी, असन, कमलादी, शांतिनगर, चाबहिल, लैनचौर और हाँडीगांव समेत कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता अस्वास्थ्यकर पाई गई।

महानगरपालिका ने लोगों से वायु प्रदूषण बढ़ाने वाली गतिविधियों से दूर रहने की अपील की है। एयर क्वालिटी इंडेक्स के वर्गीकरण के अनुसार, 101 से 150 के बीच एक्यूआई होने पर हवा संवेदनशील समूहों के लिए अस्वास्थ्यकर मानी जाती है। इसमें विशेष रूप से सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोग, बुजुर्ग, बच्चे और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग शामिल हैं। वहीं, यह स्तर 151 से 200 के बीच पहुंचने पर हवा सभी लोगों के स्वास्थ्य के लिए अस्वास्थ्यकर मानी जाती है।

पीएम 2.5 का मतलब 2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास वाले सूक्ष्म कणों से है। इसे वायु प्रदूषण के सबसे खतरनाक तत्वों में से एक माना जाता है। ये कण नाक और गले की प्राकृतिक सुरक्षा को पार करते हुए फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं और रक्तप्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे कणों के संपर्क में आने से कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, हवा में पीएम 2.5 की वार्षिक औसत सांद्रता 5 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। वहीं, 24 घंटे के औसत के लिए इसकी अधिकतम अनुशंसित सीमा 15 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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