विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की शानदार वापसी, भारतीय मुद्रा छह महीने के ऊपरी स्तर पर

युगवार्ता    06-Nov-2026
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प्रतीकात्मक


नई दिल्ली, 06 नवंबर (हि.स.)। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की घरेलू शेयर बाजार में ताबड़तोड़ खरीदारी के दम पर आज विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने जबरदस्त वापसी की है। वैश्विक बाजार में महंगे होते कच्चे तेल और अमेरिकी डॉलर की मजबूत स्थिति से बने दबाव के बावजूद भारतीय मुद्रा आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकवर होकर करीब 6 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।

हालांकि, आज के कारोबारी सत्र की शुरुआत भारतीय मुद्रा के लिए काफी सुस्त रही। रुपये ने गुरुवार के क्लोजिंग लेवल के मुकाबले गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। थोड़ी देर बाद ही विदेशी निवेशकों के भारी कैश इनफ्लो ने बाजार में रुपये की स्थिति को संभाल लिया। मुद्रा बाजार में विदेशी मुद्रा के लगातार हो रहे इनफ्लो की वजह से रुपये ने निचले स्तर से शानदार यू-टर्न लिया। 7 मई के बाद यह रुपये का सबसे मजबूत इंट्रा-डे स्तर माना जा रहा है।

आज सुबह विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.50 के स्तर पर कमजोर खुला, जबकि पिछले कारोबारी दिन यानी गुरुवार को यह 94.41 के स्तर पर बंद हुआ था। इस तरह शुरुआत में ही इसमें 9 पैसे की कमजोरी दर्ज की गई थी। इसके बाद बाजार में विदेशी फंड्स की आमद (इनफ्लो) बढ़ने से स्थिति पूरी तरह बदल गई। थोड़ी देर में ही रुपये ने तेजी से अपनी गिरावट को पाटते हुए मजबूती की राह पकड़ ली।

भारतीय मुद्रा पहले सुधरकर 94.36 के स्तर पर आई। इस स्तर पर कुछ देर टिकने के बाद इंट्रा-डे में 93.87 के 6 महीने के ऊपरी स्तर तक जा पहुंचा। आज के कारोबारी सत्र के दौरान दोपहर दो बजे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने पिछले बंद भाव से करीब 53 पैसे यानी 0.56 प्रतिशत की मजबूती दर्ज करते हुए 93.88 के स्तर के आसपास कारोबार करता हुआ नजर आया।

डॉलर के साथ-साथ आज दुनिया की अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं की तुलना में भी भारतीय रुपया जोरदार बढ़त बनाने में कामयाब रहा है। ब्रिटिश पॉन्ड (जीबीपी) के खिलाफ भारतीय रुपये में आज शानदार तेजी का रुख बना हुआ है। पिछले कारोबारी सत्र में 127.18 के स्तर पर बंद होने वाला पॉन्ड आज रुपये की मजबूती के चलते 0.84 रुपये यानी 0.66 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 126.34 के स्तर पर आ गया है, जिससे ब्रिटेन से आयात करने वालों को बड़ी राहत मिली है।

इसी तरह यूरोपीय संघ की साझा मुद्रा यूरो के मुकाबले भी रुपया आज पूरी ताकत दिखा रहा है। पिछले सत्र में 106.10 रुपये के स्तर पर बंद होने वाला यूरो आज भारतीय मुद्रा के सामने 0.75 रुपये यानी 0.71 प्रतिशत की कमजोरी का शिकार होकर 105.34 रुपये के स्तर पर कारोबार करता हुआ नजर आ रहा है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि आज सुबह के सत्र में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और डॉलर में देखी गई रिकवरी ने रुपये की शुरुआत को प्रभावित किया था। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स वैश्विक बाजार में 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ दोबारा 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुका था। चूंकि, भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल के महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है, जो रुपये की सेहत के लिए ठीक नहीं मानी जाती। इसके साथ ही, दुनिया की प्रमुख छह मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को प्रदर्शित करने वाला डॉलर इंडेक्स भी आज 0.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 101.90 के स्तर पर बना हुआ था, जिसने शुरुआती कारोबार में रुपये पर कुछ दबाव बनाए रखा था।

इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बीच भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा किया गया निवेश रुपये के लिए सबसे बड़ा जीवनदान साबित हुआ। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक बीते कारोबारी दिन विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदार की भूमिका निभाते हुए लगभग 14,974.68 करोड़ रुपये के शेयरों की बंपर खरीदारी की थी, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की लिक्विडिटी बढ़ गई।

बाजार के जानकारों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार की अपनी मजबूती और विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार किया जा रहा निवेश आने वाले समय में भी रुपये को मजबूत बनाए रख सकता है। हालांकि, रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे तनाव के साथ-साथ मिडिल ईस्ट के हालात की वजह से कच्चे तेल की कीमत में होने वाला उतार-चढ़ाव आगे रुपये की इस तेजी को थोड़ा रोक भी सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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