
नई दिल्ली, 16 फ़रवरी (हि.स.)। गेहूं की पराली जलाने पर रोक के लिए वायु प्रबंधन गुणवत्ता आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली से सटे राज्य़ों को सोमवार को व्यापक वैधानिक निर्देश जारी किए। आयोग ने इन राज्यों को जिला और ब्लॉक स्तर पर पुलिस, कृषि एवं प्रशासनिक अधिकारियों सहित “पराली सुरक्षा बल” के गठन का निर्देश दिया है। सीएक्यूएम के मुताबिक यह निर्देश पंजाब, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश सरकार को जारी किया गया है, जबकि दिल्ली और राजस्थान से भी सहयोगात्मक प्रयासों में मदद करने के लिए कहा गया है। इन निर्देशों के तहत राज्यों को जिला और ब्लॉक स्तर पर पुलिस, कृषि एवं प्रशासनिक अधिकारियों सहित “पराली सुरक्षा बल” के गठन का निर्देश दिया है। आयोग ने कहा है कि कृषि अवशेष जलाने से स्थानीय स्तर पर तथा एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित होती है, इसलिए इसके लिए संगठित मौसमी तैयारी आवश्यक है। भारतीय अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित मानक प्रोटोकॉल के अनुसार एक अप्रैल से 31 मई 2025 के बीच गेहूं कटाई सीजन में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में क्रमशः 10207, 1832 और 259 आग की घटनाएं दर्ज की गईं। उपग्रह आधारित निगरानी से स्पष्ट हुआ कि धान सीजन के साथ-साथ गेहूं सीजन में भी लक्षित हस्तक्षेप आवश्यक है।आयोग ने पहले संबंधित राज्यों को फसल अवशेष जलाने की रोकथाम एवं उन्मूलन के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान की थी और राज्य-विशिष्ट कार्ययोजनाएं तैयार करने को कहा था। 22 दिसंबर 2025 को आयोजित आयोग की 26वीं बैठक तथा उसी दिन राज्यों के साथ हुई बैठक में गेहूं पराली जलाने के मुद्दे पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया था। उस दौरान राज्यों द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजनाओं में आवश्यक संशोधन और अद्यतन करने की सलाह दी गई।आयोग ने राज्यों को कार्ययोजना का प्रभावी और पूर्ण क्रियान्वयन कर गेहूं पराली जलाने की घटनाओं को समाप्त करने के साथ-साथ प्रत्येक गांव के सभी खेतों का मानचित्रण कर पराली प्रबंधन का तरीका निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ अधिकतम 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर सभी किसानों को कवर करने और मोबाइल ऐप के माध्यम से कटाई के चरम समय में सीआरएम मशीनों की उपलब्धता और उपयोग सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं। इसके साथ देर शाम गश्त बढ़ाना और प्रवर्तन सख्त करने के भी निर्देश दिए हैं। राज्यों को आयोग को मासिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि निरंतर निगरानी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।-----------
हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी