आईआईटी खड़गपुर और सेंट पीटर्सबर्ग खनन विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सहयोग पर किए हस्ताक्षर

युगवार्ता    16-Feb-2026
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आईआईटी खड़गपुर और सेंट पीटर्सबर्ग विश्वविद्यालय ने एमओयू पर हस्ताक्षर


आईआईटी खड़गपुर और सेंट पीटर्सबर्ग विश्वविद्यालय ने एमओयू पर हस्ताक्षर


खड़गपुर, 16 फरवरी (हि. स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर ने इम्प्रेस कैथरीन द्वितीय सेंट पीटर्सबर्ग खनन विश्वविद्यालय, रूस के साथ एक रणनीतिक शैक्षणिक साझेदारी स्थापित की है। सोमवार यह समझौता ज्ञापन (एमओयू) एक वर्चुअल समारोह में हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर सेंट पीटर्सबर्ग खनन विश्वविद्यालय के रेक्टर प्रो. व्लादिमिर लिट्विनेंको तथा आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती की उपस्थिति रही। दोनों संस्थानों के प्रमुखों ने उच्च शिक्षा, शोध और प्रौद्योगिकी नवाचार के क्षेत्र में भारत–रूस सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।

यह समझौता छात्र एवं शोधार्थी विनिमय कार्यक्रम, संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान हेतु संकाय विनिमय तथा विद्यार्थियों और कार्यरत पेशेवरों के लिए संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रमों के विकास को प्रोत्साहित करेगा। दोनों संस्थान खनन अभियांत्रिकी, पेट्रोलियम अभियांत्रिकी, रबर प्रौद्योगिकी, यांत्रिक अभियांत्रिकी, रासायनिक अभियांत्रिकी, भूविज्ञान, भूभौतिकी तथा ऊर्जा एवं भू-विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुप्रयोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपलब्ध उन्नत अनुसंधान अवसंरचना का साझा उपयोग करेंगे।

समारोह में आईआईटी खड़गपुर की ओर से डीन (अंतरराष्ट्रीय संबंध) प्रो. आनंद रूप भट्टाचार्य, प्रो. किंसुक नस्कर, अध्यक्ष, रबर प्रौद्योगिकी; प्रो. बीबी मंडल, खनन अभियांत्रिकी; प्रो. संदीप कुलकर्णी, अध्यक्ष, डेसारकर केंद्र उत्कृष्टता, पेट्रोलियम अभियांत्रिकी; प्रो. दीप कुमार सिंहा, सह-प्राध्यापक, भूविज्ञान एवं भूभौतिकी विभाग; प्रो. सुवर्णा त्रिवेदी, सहायक प्राध्यापक, रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग तथा प्रो. परेश नाथ सिन्हा रॉय, समन्वयक (एसपीएमयू–आईआईटी खड़गपुर), भूविज्ञान एवं भूभौतिकी विभाग, उपस्थित रहे। सेंट पीटर्सबर्ग खनन विश्वविद्यालय की ओर से अंतरराष्ट्रीय संबंधों के उप-रेक्टर प्रो. एवगेनी ए. ल्युइबिन तथा आधिकारिक प्रतिनिधि प्रो. मैक्सिम ग्लाज़ेव भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

भारत और रूस के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह समझौता देश की ऊर्जा आवश्यकताओं-पारंपरिक कोयला एवं पेट्रोलियम से लेकर ऊर्जा संक्रमण हेतु आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों तक के समाधान में महत्वपूर्ण योगदान देगा। साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप मानव संसाधन एवं प्रौद्योगिकी विकास को सुदृढ़ करेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

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