
नई दिल्ली, 17 फ़रवरी (हि.स.)। भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ऊर्जा और पहुंच पर ध्यान केंद्रित करते हुए एआई इम्पैक्ट केसबुक जारी की गई। ये प्रकाशन सतत विकास और समावेशी विकास के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग पर वैश्विक अनुभवों को एक साथ लाते हैं।
‘ऊर्जा संग्रह’ को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के साथ साझीदारी में विकसित किया गया है। यह ऊर्जा क्षेत्र में जारी बदलाव में एआई की दोहरी भूमिका को उजागर करता है। एक ओर एआई बढ़ती कम्प्यूट जरूरतों के कारण अतिरिक्त बिजली की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, यह ऊर्जा प्रणाली दक्षता में सुधार करने में मदद कर रहा है। केसबुक सरकारी मंत्रालयों, अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों, अनुसंधान संगठनों और फाउंडेशन के सहयोग से तैयार की गई है। उन्हें विभिन्न देशों के नीति निर्माताओं और चिकित्सकों के लिए दीर्घकालिक ज्ञान संसाधनों के रूप में डिजाइन किया गया है।
इस अवसर पर एनआईसी के महानिदेशक और एमईआईटीवाई के अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि सम्मेलन-पूर्व परामर्श के प्रमुख परिणामों में से एक एआई उपयोग के मामलों, सर्वोत्तम प्रथाओं और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में वैश्विक ज्ञान का संकलन करना है। उन्होंने कहा कि यह संग्रह विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण में, जहां विकास की कई चुनौतियां समान हैं, देशों के लिए मार्गदर्शक पुस्तकों के रूप में काम करेगा।
आईईए के मुख्य ऊर्जा अर्थशास्त्री कार्यालय के विश्व ऊर्जा परिदृश्य के सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि एआई द्वारा ऊर्जा की मांग पर बहुत ध्यान दिया जाता है, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र पर एआई के सकारात्मक प्रभाव को पहचानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पहल एआई के उत्पादक उपयोगों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने को प्रोत्साहित करेगी, जिससे अर्थव्यवस्था और समाज को लाभ होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा