
नई दिल्ली, 17 फरवरी (हि.स.)। बिहार के उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट एंड एक्सपो 2026 के दौरान बिहार राज्य पवेलियन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय पंचायती राज, मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने की।
इस मौके पर बिहार सरकार की सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्रेयसी सिंह, उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल तथा राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा सहित कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञ मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि बिहार सरकार राज्य को उभरते हुए प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कर रही है। इन पहलों के तहत बिहार एआई मिशन के अंतर्गत मेगा एआई कोर ऑफ इंजीनियरिंग की स्थापना, उद्योग एवं शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी, निवेशकों के साथ निवेश समझौते तथा बिहार जीसीसी नीति 2026 और बिहार सेमीकंडक्टर नीति 2026 का शुभारंभ शामिल है। इसके अलावा आईआईटी पटना में अत्याधुनिक रिसर्च पार्क स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है, जिससे अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास को नई गति मिलेगी।
समिट के दौरान बिहार सरकार ने प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों और आईआईटी पटना के साथ कुल 468 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इनमें बिहार एआई उत्कृष्टता केंद्र (एआई-कोड) की स्थापना के लिए 60 करोड़ रुपये तथा आईआईटी पटना में रिसर्च पार्क के निर्माण के लिए 250 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। इस परियोजना में टाइगर एनालिटिक्स उद्योग भागीदार तथा आईआईटी पटना शैक्षणिक भागीदार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इसके अतिरिक्त बिहार जीसीसी नीति 2026 और बिहार आईटी नीति 2024 के अंतर्गत रेड साइबर, ग्रोक्यूआर और सीआईपीएल जैसी प्रमुख आईटी और जीसीसी कंपनियों के साथ भी निवेश और तकनीकी सहयोग के समझौते किए गए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य राज्य में निवेश को आकर्षित करना, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करना, नवाचार को बढ़ावा देना और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।
बिहार सरकार का मानना है कि इन पहलों से राज्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तेजी से विकास होगा। साथ ही, इससे बिहार को देश के अग्रणी तकनीकी और नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी