
नई दिल्ली, 17 फरवरी (हि.स.)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026’ में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) भारत की तकनीकी प्रगति की यात्रा में नया अध्याय जोड़ेगा और देश को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
भारत मंडपम में शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित “पुशिंग द फ्रंटियर ऑफ एआई इन इंडिया” विषयक विशेष सत्र में प्रधान ने कहा कि यह सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी पहल का हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारत में एआई के विकास को प्रोत्साहित करना और वैश्विक मंच पर देश की क्षमता को प्रदर्शित करना है। भारत तीव्र गति से एआई को अपनाते हुए वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
प्रधान ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में एआई का उपयोग और एआई आधारित शिक्षा एक-दूसरे के पूरक हैं। आज की युवा पीढ़ी नई सोच और नवाचार की क्षमता से परिपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से एआई को अपनाने, इसके माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाने और नए समाधान विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं के प्रयास ही भारत को वैश्विक एआई मानचित्र पर अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करेंगे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के अनुरूप शिक्षा प्रणाली में एआई के एकीकरण को मंत्रालय का प्रमुख प्रयास बताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में डिजिटल प्लेटफॉर्म, नीतिगत ढांचे, संस्थागत सुधार, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और उन्नत अनुसंधान-नवाचार के लिए एआई-समर्थ आधारभूत संरचना तैयार की गई है। इस सत्र का उद्देश्य भारत के राष्ट्रीय एआई-इन-एजुकेशन रोडमैप को तैयार करना और उद्योग, शिक्षाविदों तथा सरकार के बीच सहयोग को मजबूत करना है।
कार्यक्रम में शिक्षा एवं कौशल विकास राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि समिट में शिक्षा के विभिन्न स्तरों- प्रारंभिक शिक्षा, कौशल विकास, अनुसंधान और वैश्विक नेतृत्व में एआई के संरचित एकीकरण पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने मंत्रालय और स्किल इंडिया पवेलियन का भी दौरा किया, जहां भारत-केंद्रित एआई समाधानों का प्रदर्शन किया गया।
उल्लेखनीय है कि पिछले एक दशक में शिक्षा मंत्रालय ने डिजिटल प्लेटफॉर्म, नीतिगत ढांचे, संस्थागत सुधार और व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से एआई-सक्षम शिक्षा की नींव मजबूत की है। बजट घोषणा के बाद सरकार ने आईआईटी मद्रास में एआई फॉर एजुकेशन के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की है।
सत्र में उद्योग जगत और निवेश पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें ज़ोहो कॉर्पोरेशन के संस्थापक और सीईओ डॉ. श्रीधर वेम्बू, इन्फ्लेक्शन के टेक्नोलॉजिस्ट और इनोवेशन लीडर डॉ. विभु मित्तल, पीक XV पार्टनर्स के प्रबंध निदेशक राजन आनंदन, आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि, आईआईटी बॉम्बे की प्रो. सुनीता सरावगी सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल थे। इस सत्र का संचालन आईआईटी जम्मू के निदेशक प्रोफेसर मनोज एस. गौर ने किया।
चर्चा में एआई के जिम्मेदार उपयोग, स्वदेशी नवाचार, राष्ट्रीय शिक्षण प्लेटफॉर्म, शासन ढांचे और उद्योग–अकादमिक–सरकार सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया। सत्र का उद्देश्य शिक्षा में एआई के लिए राष्ट्रीय रोडमैप तैयार करना और इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में ठोस रणनीति विकसित करना था।
-----------
हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार