मंगोलिया के लिए भारत सिर्फ पड़ोसी नहीं, एक 'पवित्र भूभाग' है: गजेंद्र शेखावत

युगवार्ता    19-Feb-2026
Total Views |
आईजीएनसीए में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन


नई दिल्ली, 19 फरवरी (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने गुरुवार को कहा कि मंगोलिया में भारत को एक 'पवित्र भूभाग' और 'आध्यात्मिक पड़ोसी' के रूप में देखा जाता है।

गजेन्द्र शेखावत ने यह बात आज नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में भारत और मंगोलिया के बीच राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ पर कही। यह कार्यक्रम 'भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान' विषय पर आधारित है। इसे आईजीएनसीए के 'बृहत्तर भारत और क्षेत्र अध्ययन विभाग' की ओर से आयोजित किया गया है।

मुख्य अतिथि के रूप में शेखावत ने कहा, यह सम्मेलन भारत और मंगोलिया के बीच साझा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 2015 की मंगोलिया यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि दोनों देशों का संबंध केवल धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि खगोल विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य और दर्शन जैसे क्षेत्रों में सदियों पुराना साझा इतिहास समेटे हुए है।

संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा कि भारत और मंगोलिया साझा सभ्यतागत स्मृति और सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित साझेदारी को आकार दे रहे हैं। उन्होंने तेल शोधन परियोजना, रक्षा, शिक्षा और मंगोलियाई कांग्यूर के प्रसार जैसी पांडुलिपि संरक्षण पहलों सहित रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग का उल्लेख किया। मौसम परियोजना और बृहत्तर भारत परियोजना के तहत, यूनेस्को में बहुराष्ट्रीय मान्यता के लिए साझा अमूर्त विरासत का दस्तावेजीकरण और संरक्षण करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मंगोलियाई राजदूत गनबोल्ड दंबाजाव ने भारत को अपना 'आध्यात्मिक पड़ोसी' बताते हुए बौद्ध धर्म को साझा विरासत का केंद्र बताया। उन्होंने कंग्यूर और तेंग्यूर जैसे प्राचीन ग्रंथों के संरक्षण और अनुवाद में भारत की भूमिका की प्रशंसा की और कहा कि यह सहयोग दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक तथा सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है।

​यह मंच भारत और मंगोलिया के बीच पुरातत्व, कला, साहित्य और आध्यात्मिक जुड़ाव के विविध पहलुओं पर गहन चर्चा का अवसर प्रदान करता है।

इस अवसर पर मंगोलियाई संस्कृति के दृश्य निरूपणों को प्रदर्शित करने वाली एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। यह प्रदर्शनी 25 फरवरी तक जनता के लिए खुली रहेगी। इस सम्मेलन में भारत, मंगोलिया, अमेरिका, फ्रांस और अन्य देशों के 31 विद्वान शामिल होंगे। इन दो दिनों में 75 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

Tags