
कछार (असम), 20 फरवरी, (हि.स.)। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कछार जिले के भारत-बांग्लादेश सीमा स्थित नाथुनपुर में ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II’ का शुभारंभ किया। इस अवसर को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण बताते हुए उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांव अब देश के विकास के नए केंद्र बनेंगे। कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती गांवों को “राष्ट्र के प्रथम गांव” की नई पहचान देने की बात कही।
केंद्रीय गृहमंत्री के साथ मुख्यमंत्री ने असम राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत लगाए गए 20 स्वयं सहायता समूहों के स्टॉल का भी अवलोकन किया और महिला उद्यमियों से संवाद किया। इन स्टॉलों में स्थानीय हस्तशिल्प, वस्त्र और अन्य उत्पाद प्रदर्शित किए गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल बराक घाटी की महिलाओं में आत्मनिर्भरता की बढ़ती भावना को दर्शाती है और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II’ के तहत असम के 9 जिलों के 140 गांवों, जिनमें कछार जिले के 11 गांव शामिल हैं, का समग्र विकास किया जाएगा। इन गांवों में विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना, बेहतर सड़क संपर्क और सतत आजीविका के अवसर विकसित किए जाएंगे। योजना के अंतर्गत चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति, सुदृढ़ परिवहन व्यवस्था और मजबूत दूरसंचार नेटवर्क सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों का आर्थिक सशक्तिकरण हो और राष्ट्रीय सुरक्षा भी मजबूत हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में असम उपेक्षा से सशक्तिकरण की ओर अग्रसर हुआ है और सीमावर्ती क्षेत्र अब ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप विकास के नए केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृहमंत्री का बराक घाटी की पारंपरिक अस्मिता के प्रतीकों - उत्तरिया, रोंगमेई नगा हस्तबुनी शॉल तथा पारंपरिक मैतेई चटाई से स्वागत किया, जो क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश