

खूंटी, 20 फ़रवरी (हि.स.)। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि जिस आदिवासी ने अपनी परंपरा और पूजा पद्धति छोड़ दी, वे ईसाई ही जनजातियों के आरक्षण का 80 प्रतिशत हिस्सा हड़प रहे हैं और सही आदिवासियों का हक मार रहे हैं। परांडे शुक्रवार को खूंटी के रनिया में सर्व सनातन समाज की ओर से आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हिन्दू ही हिंदू की आबादी घटा रहा है, जबकि मुसलमानों और ईसाइयों की आबादी लगातार बढ़ रही है। परांडे ने कहा कि विश्व में 50 से अधिक इस्लामिक और 120 ईसाई देश हैं, जबकि भारत और नेपाल ही ऐसे देश हैं जहां हिंदू बहुसंख्यक हैं। ऐसे में हिंदू समाज को अपने अस्तित्व, परंपराओं और पहचान को लेकर गंभीरता से विचार करना होगा।
मिलिंद परांडे ने कहा कि हिंदू समाज विश्व का सबसे प्राचीन समाज है, जो हजारों-लाखों वर्षों से अस्तित्व में रहा है। उन्होंने भगवान श्रीराम के वनवास, राम मंदिर आंदोलन और झारखंड के लगभग दो हजार गांवों से सरनास्थलों की मिट्टी के राम मंदिर निर्माण में उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्राचीन परंपराओं की जीवंत मिसाल है।
उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक हिंदू को अपनी संस्कृति और परंपरा की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान में ‘जनजातीय’ शब्द और एसटी आरक्षण का प्रावधान जनजातीय समाज की परंपरा, पूजा-पद्धति और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए किया गया था। आरोप लगाया गया कि 1947 के बाद आरक्षण का बड़ा हिस्सा ईसाई मिशनरियों से जुड़े लोगों ने लिया, जबकि परंपरागत आदिवासी इससे वंचित रह गए। इस संदर्भ में कार्तिक उरांव द्वारा ईसाई धर्म अपनाने वालों को आरक्षण से वंचित करने के लिए लाए गए विधेयक की चर्चा की गई, जिसे तत्कालीन सरकार ने स्वीकार नहीं किया।
विहिप के केंदीय संगठन महामंत्री ने कहा कि आज बड़ा संकट यह है कि हिंदू समाज की ओर से दिए गए अधिकारों का दुरुपयोग कर हिंदू परंपराओं का अपमान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज को अपनी परंपरा की रक्षा का अधिकार है और इस विषय पर गंभीर विमर्श आवश्यक है।
सम्मेलन में बिरसा मुंडा के जीवन संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा गया कि किस प्रकार जबरन धर्मांतरण और दमन के खिलाफ आंदोलन करने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया और उनकी मृत्यु जेल में हुई। वक्ताओं ने चेताया कि आज भी गांवों में धर्मांतरण के प्रयास हो रहे हैं, जिससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है।
अंत में वक्ताओं ने कहा कि हिंदू समाज को आपस में लड़ाने की साजिशों से सतर्क रहना होगा और एकजुट होकर अपनी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा करनी होगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा ने कहा कि हिन्दू समाज केवल एक-दो वर्षों के नहीं, बल्कि हजारों वर्षों के आक्रमणों का शिकार रहा है। आस्था के केंद्र रहे मंदिरों को तोड़ा गया, जिससे समाज का आत्मबल कमजोर हुआ। इस दीर्घ आक्रमण काल में हिन्दू समाज का विघटन हुआ, जिसके लिए कहीं न कहीं समाज स्वयं भी जिम्मेदार रहा, क्योंकि हम अपनी व्यक्तिगत चिंताओं में उलझते चले गए।
समाज को संगठित करने के उद्देश्य से विजया दशमी के दिन वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई। संघ का मुख्य उद्देश्य हिन्दू समाज को संगठित करना और देश व समाज के लिए समर्पित भाव से कार्य करना रहा है। वर्ष 2025-26 में संघ ने अपने 100 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं, जो हिन्दू संगठन और समाज के लिए गर्व का विषय है।
प्रांत प्रचारक ने कहा कि हिन्दू इस देश के मूल आदिवासी हैं। उन्होंने कहा कि जो हमारे संविधान, मातृभूमि, परम्परा के विरुद्ध बात करेगा उन्हें पहचानना चाहिए । गोपाल शर्मा ने कहा कि अपनी बहू बेटियों, परम्परा की रक्षा का संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि बाहरी आक्रमणकारियों ने जातियों में विभाजन पैदा किया, जिससे देश गुलाम हुआ। यदि सभी जातियों के लोग मिलकर कार्य करें, तो देश को फिर से सशक्त बनाया जा सकता है। आज भी हिन्दू समाज को तोड़ने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन संगठन और एकता से हर चुनौती का सामना करना संभव है।
कार्यक्रम को वनवासी कल्याण केंद्र के मुसाफिर विश्वकर्मा, विहिप के जिलाध्यक्ष विनोद जायसवाल, विकास मिश्रा, सुभाष मिश्रा, संतोष जायसवाल, निखिल कंडुलना, दीपक तिग्गा,नीरज पाढ़ी, मनोज चौधरी, राजन चौधरी, नीरज जायसवाल, पूनम भेंगरा, केशव कुमार सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा