अटल बिहारी वाजपेयी के लिए राजनीति से सर्वोपरि सदैव मानवीय मूल्य और राष्ट्रहित रहे:सीपी राधाकृष्णन

युगवार्ता    21-Feb-2026
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पुस्तक लोकार्पण


नई दिल्ली, 21 फरवरी (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के लिए राजनीति से सर्वोपरि सदैव मानवीय मूल्य और राष्ट्रहित रहे।

उन्होंने राष्ट्र से वाजपेयी के एकता और लोकतंत्र के आदर्शों को आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

सीपी राधाकृष्णन ने यह बात आज नई दिल्ली स्थित अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में पुस्तक 'अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन' के लोकार्पण के दौरान कही। यह अटल बिहारी वाजपेयी के गौरवशाली जीवन और उनके व्यक्तित्व पर आधारित है। इस पुस्तक के लेखक गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के उपाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल हैं। यह पुस्तक भारतीय राजनीति को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए भी एक अनमोल दस्तावेज साबित होगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राधाकृष्णन ने कहा, अटल बिहारी केवल एक प्रधानमंत्री नहीं थे वे एक कवि एक दूरदर्शी एक उत्कृष्ट सांसद और सबसे बढ़कर एक दयालु इंसान थे। उन्होंने कहा कि यह प्रकाशन मात्र तस्वीरों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक ऐसे राजनेता का सम्मान है जिनका जीवन और विरासत राष्ट्र को प्रेरित करती रहती है।

राधाकृष्णन ने कहा कि यह कृति दुर्लभ तस्वीरों, व्यक्तिगत किस्सों और अभिलेखीय सामग्री के माध्यम से इतिहास को जीवंत स्मृति के रूप में संरक्षित करती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक देश भर के घरों और संस्थानों तक पहुंचेगी और विशेष रूप से युवा पीढ़ी को राष्ट्रीय एकता, लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव के आदर्शों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करेगी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वाजपेयी का सांसद से प्रधानमंत्री तक का सफर भारतीय लोकतंत्र की शक्ति का प्रतीक है। तीव्र राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के दौर में भी उन्होंने अपनी सत्यनिष्ठा, समावेशी दृष्टिकोण और गरिमामय आचरण के लिए सभी दलों का सम्मान अर्जित किया।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि 'कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत' ये तीन मंत्र केवल कश्मीर के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के सुचारू संचालन के लिए अनिवार्य हैं। जब तक देश इन तीन मंत्रों के मार्ग पर चलेगा, तब तक भारतीय लोकतंत्र अक्षुण्ण रहेगा।

उन्होंने कहा कि अटल के ये सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक स्तंभ के रूप में हमेशा अमर रहेंगे।

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ बिताए संस्मरणों को करते हुए राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि जब वह सुदूर गांव में गए तो वहां उनसे मजदूरों ने खराब गेहूं मिलने की शिकायत की। अटल ने तुरंत इसका संज्ञान लिया और अगले ही दिन प्रशासन को गेहूं बदलना पड़ा।

बागडे ने 1987 के उनके ऐतिहासिक भाषण 'आता हिंदु मार खाणार नाही' (अब हिंदू मार नहीं खाएगा) को याद किया और कहा कि उस दौर में अटल की कविता 'हिंदू तन-मन, हिंदू जीवन' की पंक्तियों ने पूरे महाराष्ट्र में नई चेतना जागृत कर दी थी।

अटल बिहारी वाजपेयी को 'इंटरनल स्टेट्समैन' बताते हुए बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि वह एक ऐसे ही 'राजयोगी' थे जिनके हृदय में राष्ट्र के प्रति अगाध प्रेम था।

उन्होंने 'राजयोगी' और 'राजनेता' के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि जो व्यक्ति राष्ट्र प्रेम से प्रेरित होकर सत्ता का उपयोग जनसेवा के लिए करता है, वह 'राजयोगी' है, जबकि केवल स्वार्थ सिद्धि के लिए सत्ता चाहने वाला 'राजनेता' कहलाता है।

गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के उपाध्यक्ष विजय गोयल ने कहा कि वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक संवेदनशील कवि और दूरदर्शी स्टेट्समैन थे। उनकी राजनीति विभाजन की नहीं, बल्कि समावेश की राजनीति थी। विचारधारा के प्रति समर्पित रहते हुए भी वे कभी कट्टर नहीं हुए।

इस मौके पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, हरियाणा के राज्यपाल प्रो. अशीम कुमार घोष और राजनीति जगत की कई दिग्गज नेताओं कार्यकर्ताओं सहित अन्य गणमान्य जन मौजूद रहे।---------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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