भारत-नेपाल व्यापार महोत्सव आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊंचाई पर पहुंचाने के उद्देश्य के साथ संपन्न

युगवार्ता    23-Feb-2026
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भारत-व्यापार महोत्सव का जारी फोटो


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नई दिल्ली, 23 फरवरी (हि.स)। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में तीन दिनों तक चला भारत-नेपाल व्यापार महोत्सव बहुआयामी आर्थिक, प्राविधिक और सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊंचाई पर पहुंचाने के उद्देश्य के साथ संपन्न हो गया। एवरेस्ट चैंबर ऑफ कॉमर्स (ईसीसीआई) की ओर से 20-22 फरवरी को हुए इस महोत्सव में नेपाल पर्यटन बोर्ड तथा व्यापार तथा निकासी प्रवर्द्धन केंद्र ने सहयोग किया।

हौज खास स्थित पीएचडी भवन में आयोजित इस व्यापार महोत्सव में 50 से अधिक स्टॉल लगाए गए थे, जिसमें 20 हजार से अधिक दर्शकों की सहभागिता रही। इस मेले का उद्घाटन भारत में नेपाल के राजदूत डॉ. शंकर प्रसाद शर्मा ने किया था। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने पर्यटन प्रवर्द्धन को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर बतौर विशेष अतिथि भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव मुनु महावर ने बताया कि भारत–नेपाल स्टार्टअप साझेदारी के तहत 40 नेपाली उद्यमियों को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास में प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से कुछ उद्यमियों का चयन इन्क्यूबेशन और निवेश के लिए भी हुआ है।

ऊर्जा साझेदारी: “हिमालयन कंप्यूट कॉरिडोर” की अवधारणा

भारत-नेपाल व्यापार महोत्सव 2026 के “हिमालयी जलविद्युत का दोहन” सत्र में ऊर्जा उत्पादन, व्यापार उदारीकरण, ट्रांसमिशन लाइन सुदृढ़ीकरण और स्थिर नीतिगत वातावरण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि नेपाल के पास उपलब्ध स्वच्छ जलविद्युत और ठंडी जलवायु डेटा सेंटर के लिए उपयुक्त है। इसके आधार पर “हिमालयन कंप्यूट कॉरिडोर” की अवधारणा प्रस्तुत की गई। भारत की एआई–केंद्रित विकास रणनीति के लिए दीर्घकालीन ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में नेपाल एक रणनीतिक साझेदार बन सकता है। ऊर्जा निर्यात से पहले आंतरिक ऊर्जा सुदृढ़ीकरण, ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय आपूर्ति और ट्रांसमिशन अवसंरचना विस्तार की आवश्यकता पर सभी सहमत दिखे।

बैंकिंग, फिनटेक और डिजिटल अर्थव्यवस्था

“भारत-नेपाल बैंकिंग और फिनटेक व्यवसाय के अवसर और चुनौतियां” सत्र में डिजिटल भुगतान, क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस, मौद्रिक समन्वय और साइबर सुरक्षा पर गहन चर्चा हुई। इस दौरान वक्ताओं ने क्यूआर आधारित भुगतान प्रणाली की अंतर-संबद्धता, चिकित्सा एवं शिक्षा प्रयोजन के लिए धन हस्तांतरण में सहजता तथा नियामक समन्वय की जरूरत पर बल दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बैंकिंग की पहुंच बढ़ाने और वित्तीय समावेशन सुदृढ़ करने हेतु दोनों देशों के नियामक निकायों के बीच संरचनात्मक सहयोग आवश्यक बताया गया।

पर्यटन: रामायण–बुद्ध सर्किट से डेस्टिनेशन वेडिंग तक

“भारत-नेपाल पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र” सत्र में रामायण सर्किट, बुद्ध सर्किट, साहसिक पर्यटन, वेलनेस और डेस्टिनेशन वेडिंग को एकीकृत रणनीति के तहत आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई। सीमा प्रबंधन में सुधार, स्पष्ट ब्रांडिंग, आक्रामक विपणन और नीतिगत स्पष्टता के बिना अपेक्षित उपलब्धियां संभव नहीं होंगी, ऐसा मत व्यक्त किया गया। भारतीय पर्यटकों की विशाल संभावनाओं का प्रभावी उपयोग करने पर पर्यटन अर्थव्यवस्था में व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

मीडिया, विश्वास और डिजिटल युग

“मीडिया, गलत सूचना और आपसी विश्वास” सत्र में डिजिटल युग में जिम्मेदार पत्रकारिता के महत्व पर बल दिया गया। अभिजीत मजूमदार और पंकज मिश्रा और दीपक खांड सहित कई वक्ताओं ने कहा कि गलत सूचना और भ्रामक कथानक द्विपक्षीय संबंधों पर दीर्घकालीन प्रभाव डाल सकते हैं। जनस्तर के संबंधों को सुदृढ़ करते हुए विविध और बहुआयामी कथानकों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की गई।

युवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और अनुसंधान

“युवा जुड़ाव, स्वास्थ्य और शैक्षिक साझेदारी” इस सत्र में योग, आयुर्वेद, अनुसंधान सहयोग और छात्र कूटनीति को प्राथमिकता देने का संदेश दिया गया। क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग, छात्रवृत्ति विस्तार, अनुसंधान–केंद्रित साझेदारी और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता पर बल दिया गया।

एआई, स्टार्टअप और विजन 2030

“विज़न 2030: इनोवेशन, एआई और स्टार्टअप्स” सत्र में प्रतिस्पर्धा की बजाय सहयोग को प्राथमिकता देने का निष्कर्ष सामने आया। नेपाल के हरित ऊर्जा स्रोत और युवा जनशक्ति को डेटा सेंटर और एआई इकोसिस्टम के लिए अवसर के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही नीतिगत स्पष्टता, कर सहजीकरण और प्रौद्योगिकी–सुरक्षा संतुलन बनाए रखने पर नेपाल–भारत टेक सहयोग दक्षिण एशिया के लिए एक उदाहरणीय मॉडल बन सकता है, ऐसा विश्वास व्यक्त किया गया।

तीन दिनों तक आयोजित भारत-नेपाल व्यापार माहोत्सव के दौरान 10 से अधिक उच्चस्तरीय सत्रों और नीति–संवादों ने स्पष्ट किया कि नेपाल–भारत संबंध अब पारंपरिक व्यापारिक ढाँचे से आगे बढ़कर ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, नवाचार, पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक कूटनीति की एकीकृत संरचना की ओर अग्रसर हैं। स्थिर नीति, अवसंरचना विकास, निजी क्षेत्र की सक्रियता, जिम्मेदार संचार अभ्यास और जनस्तर के संबंधों को सुदृढ़ कर साझा समृद्धि हासिल की जा सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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