राजस्थान और मध्यप्रदेश मिलकर बढ़ा रहे 'राम' की महिमा : मोहन यादव

युगवार्ता    26-Feb-2026
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजस्थान के भीलवाड़ा में सनातन मंगल महोत्सव एवं संत समागम को संबोधित किया


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजस्थान के भीलवाड़ा में सनातन मंगल महोत्सव एवं संत समागम को संबोधित किया


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भीलवाड़ा के हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में गादी पूजन किया


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भीलवाड़ा के हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में गादी पूजन किया।


भोपाल, 26 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को कहा कि 'रा' से राजस्थान और 'म' से मध्यप्रदेश मिलकर 'राम' की महिमा बढ़ा रहे हैं। हमारी सरकार राम और कृष्ण के जहां-जहां चरण पड़े, उन स्थानों को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित कर रही है। हम श्रीरामचन्द्र गमन पथ और श्री कृष्ण पाथेय तैयार कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव गुरुवार को राजस्थान के भीलवाड़ा में हरिशेवा उदासीन आश्रम के स्थानापति परमपूज्य श्री महामण्डलेश्वर स्वामी हंसरामजी महाराज की मौजूदगी में हुए सनातन मंगल महोत्सव, संत समागम एवं दीक्षा महोत्सव में शामिल हुए। राजा भलराज भील की नगरी भीलवाड़ा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामी हंसरामजी महाराज से भेंटकर उनका सानिध्य और आशीर्वाद भी प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने मंगल महोत्सव एवं संत समागम में देश-विदेश से आये विद्वतजनों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी महान और गौरवशाली भारतीय संस्कृति के संवाहक हैं। खुद के लिए तो सब जीते हैं, संसार के सभी प्राणियों, जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों-वनस्पतियों के कल्याण के जीवोमूल लक्ष्य के लिए जीना ही हम सबका परम सेवाधर्म होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें सेवा, समर्पण, विश्व बंधुत्व और सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की परोपकारी भावना में निहित हैं। सेवाभाव ही हमारी संस्कृति का प्राण है और जीवमात्र की सेवा ही श्रीहरि की सेवा है, सम्पूर्ण मानवता की सेवा है। मोहन यादव ने कहा कि सामाजिक जीवन में नैतिक मूल्यों, करुणा, सद्भाव और समरसता के प्रसार में संतजनों की भूमिका अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। पूज्य हंसरामजी महाराज धर्म के सभी मूल्यों, भक्ति, सेवा, सत्य, अहिंसा को जीवंत रख रहे हैं। आश्रम के माध्यम से आपने हजारों असहायों को सहारा दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृति से ही हमारी पहचान है। हमारी सरकारें जीवन मूल्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा, पर्यावरण पर एकजुट होकर काम कर रही हैं। हमें संकल्प लेना होगा कि हम अपने बच्चों को वेद-पुराण पढ़ाएं, संस्कार दें, सेवा में लगाएं और धर्म की रक्षा करें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धर्म का मंगल तभी संभव है, जब हम संतजनों के उपदेशों को अपने जीवन में भी उतारें। उन्होंने कहा कि धर्म हमारे जीवन का सार है, जो हमें बताता है कि हम कौन हैं, हमारा उद्देश्य क्या है और इस उद्देश्य के लिए हम किस दिशा में आगे बढ़ें। भगवान श्रीराम का गुरु वशिष्ठ से तथा श्रीकृष्ण का गुरु सांदीपनि से शिक्षा गृहण करना हमें गुरु-शिष्य परंपरा सिखाता है। आज हमें इन्हीं जीवन मूल्यों को पुन: स्थापित करने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि सिंहस्थ कुंभ के माध्यम से उज्जैन को देशभर के साधु-संतों का आशीर्वाद मिलता रहा है। सनातन संस्कृति में हमारे बच्चे परिवार को अमरता प्रदान करते हैं। यत्र पिंडे-तत्र ब्रह्मांडे, जैसा हमारे पिंड में है वैसा ही ब्रह्मांड में है। संतों के माध्यम से करोड़ों साल से ज्ञान की गंगा प्रवाहित होती रही है। साधु-संतों के जरिए हमें देवताओं के दर्शन होते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. ने कहा कि जब बृहस्पति ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तब सिंहस्थ होता है। उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ का भव्य आयोजन होने वाला है। मुख्यमंत्री ने सभी साधु-महात्माओं और संत-वृंदों को सिंहंस्थ में आकर सबको आशीष रूपी अमृत देने के लिए आमंत्रित भी किया।

सनातन मंगल महोत्सव एवं संत समागम में 3 युवा संतों ईशानराम महाराज, केशवराम महाराज और सुमज्ञराम महाराज को सन्यास की दीक्षा दिलाई गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तीनों युवा संन्यासियों का माल्यार्पण एवं नमन करते हुए उनका अभिनंदन किया।

राजस्थान सरकार के सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक ने कहा कि भीलवाड़ा एक धार्मिक नगरी है। यह हरि और हर के मिलन केंद्र जैसा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प से आज अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो चुका है। हमारा 500 साल पुराना सपना अब साकार हो गया है।

मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज ने हरिशेवा धाम में आयोजित सनातन मंगल महोत्सव और संत समागम में पधारने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना। उन्होंने बताया कि स्वामी हंसरामजी महाराज हंसगंगा यात्रा निकाल रहे हैं, यह एक बेहद अनुकरणीय पहल है। उन्होंने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति में दीक्षा संस्कार गुरु-शिष्य की प्राचीन परंपरा को आगे ले जाता है। हमें अपने बच्चों को बाल्यकाल से ही संतों की शरण में जरूर भेजना चाहिए, ताकि वे बचपन से ही अपनी धर्म परम्पराओं और संस्कारों से जुड़ें।

संत समागम को भीलवाड़ा के सांसद दामोदर अग्रवाल, महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी महाराज और पूज्य ज्ञानेश्वरी दीदी ने भी संबोधित किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

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