डब्ल्यूटीओ जुलाई में करेगा भारत की आठवीं व्यापार नीतियों की समीक्षा

युगवार्ता    26-Feb-2026
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डब्ल्यूटीओ में सीबीआईसी के बैठक का जारी फोटो


डब्ल्यूटीओ में सीबीआईसी के बैठक का जारी फोटो


नई दिल्ली, 26 फरवरी (हि.स)। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) इस साल जुलाई में भारत की आठवीं व्यापार नीति की समीक्षा करेगा। इस दौरान सदस्य देशों की तरफ से भारत की व्यापार नीतियों की व्यापक समीक्षा की जाएगी।

वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि व्यापार नीतियों की जुलाई में समीक्षा से पहले सीमा शुल्क आयोग के सदस्य के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने डब्ल्यूटीओ में भारत के डिजिटल कस्टम सुधारों और व्यापार सुगमता समझौते (टीएफए) के क्रियान्वयन को प्रस्तुत किया।

मंत्रालय के मुताबिक इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के सदस्य (सीमा शुल्क) सुरजीत भुजबल ने किया। इसके पहले भारत की सातवीं व्यापार नीति समीक्षा जनवरी, 2021 में जिनेवा स्थित डब्ल्यूटीओ में की गई थी।

वित्त मंत्रालय ने बताया कि सीबीआईसी और भारत के स्थायी मिशन ने 24 फरवरी को डब्ल्यूटीओ में विशेष व्यापार सुगमता सत्र आयोजित किए थे। जिनेवा में आयोजि इन सत्रों में लगभग 40 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिससे भारत के अनुभव और बेहतर व्यवहार में व्यापक रुचि दिखाई दी। मंत्रालय ने कहा कि भारत ने डब्ल्यूटीओ के व्यापार सुगमता समझौते के तहत अपनी 100 फीसदी प्रतिबद्धताओं को तय समय-सीमा के भीतर अधिसूचित कर दिया है। इसके बाद अब देश ‘टीएफए प्लस’ उपायों की ओर बढ़ रहा है, जो राष्ट्रीय व्यापार सुगमता कार्ययोजना (एनटीएफएपी 3.0) के तहत न्यूनतम मानकों से आगे जाकर वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप सुधारों पर केंद्रित हैं।

विशेष सचिव और सदस्य (सीमा शुल्क) सुरजीत भुजबल ने कहा पिछले एक दशक में सीमा-शुल्क प्रक्रिया के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण से व्यापार वृद्धि और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में भारत के एकीकरण को मजबूती मिली है। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) जिनेवा में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि डॉ. सेंथिल पांडियन ने कहा कि भारत ने व्यापार सुगमता सुधारों को अपनी व्यापार नीति का एक मुख्य स्तंभ बनाया है

मंत्रालय ने बताया कि व्यापार सुगमता पर आयोजित सत्र के दौरान भारतीय सीमा शुल्क विभाग ने ‘सम्पूर्ण-सरकार दृष्टिकोण’ पर जोर देते हुए चेहरा-रहित, संपर्क-रहित और कागज-रहित सीमा-शुल्क व्यवस्था बनाने के प्रयासों को रेखांकित किया। इससे व्यापक डिजिटलीकरण और प्रक्रियाओं में सुधार से सीमापार व्यापार को सरल बनाने में मदद मिली है। मंत्रालय ने कहा कि डिजिटल कस्टम प्रणाली के माध्यम से व्यापारी, बैंक, लॉजिस्टिक कंपनियां और सीमा-शुल्क प्राधिकरण आपस में जुड़े हैं, जिससे दस्तावेजों की इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया संभव हुई है, लेनदेन लागत घटी है और माल की निकासी के समय में कमी आई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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