
साणंद, 28 फरवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी की सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्ट और पैकेजिंग (एटीएमपी) फैसिलिटी का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि दुनिया तक यह संदेश स्पष्ट रूप से पहुंच चुका है कि “इंडिया इज केपेबल, इंडिया इज कॉम्पिटिटिव, इंडिया इज कमिटेड।” उन्होंने कहा कि यदि पिछली शताब्दी का रेगुलेटर तेल था, तो इस शताब्दी का रेगुलेटर माइक्रोचिप होने वाली है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में साणंद के परिवर्तन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी आंखों से इस क्षेत्र को एक कार फैक्टरी से देश के प्रमुख ऑटोमोबाइल हब में बदलते देखा है। एक बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी के आने से यहां संपूर्ण औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित हुआ, सहायक इकाइयां स्थापित हुईं, सप्लायर नेटवर्क बना, स्थानीय उद्योग मजबूत हुआ और रोजगार एवं निवेश दोनों में वृद्धि हुई। आज देश-विदेश से लोग यहां काम करने आ रहे हैं और एक छोटा शहर वैश्विक मानचित्र पर अपनी जगह बना चुका है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार ऑटोमोबाइल सेक्टर में साणंद ने सफलता की नई कहानी लिखी, उसी प्रकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी यह नया अध्याय रचेगा। इस संयंत्र में अभी सैकड़ों लोगों को रोजगार मिला है और भविष्य में इसके विस्तार के साथ रोजगार के और अवसर सृजित होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह माइक्रोन सुविधा भारत के नए मिजाज का उदाहरण है। नीति से लेकर उत्पादन तक, आज का भारत जिस दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है, वह यहां स्पष्ट दिखाई देता है। जून 2023 में इस परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे और फरवरी 2026 में यह संयंत्र वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर चुका है। जो लोग इस क्षेत्र की जटिलताओं को समझते हैं, वे इस गति के महत्व को भलीभांति जानते हैं।
उन्होंने कहा कि जब नीयत साफ हो और लक्ष्य देश का तीव्र विकास हो, तो नीतियां भी स्पष्ट बनती हैं और निर्णयों में तेजी आती है। प्रधानमंत्री ने माइक्रोन के नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना भारत और अमेरिका के बीच मजबूत सहयोग और रणनीतिक साझेदारी का भी प्रमाण है। विशेष रूप से एआई और सेमीकंडक्टर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन ने दुनिया को भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्षमता से परिचित कराया है और आज का यह कार्यक्रम टेक्नोलॉजी लीडरशिप के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। सॉफ्टवेयर के लिए पहचाने जाने वाला भारत अब हार्डवेयर क्षेत्र में भी अपनी सशक्त पहचान बना रहा है और तेजी से ग्लोबल सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन का हिस्सा बन रहा है।
उन्होंने याद दिलाया कि जब दुनिया कोविड महामारी से जूझ रही थी, तब भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन की घोषणा की थी। भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत स्वीकृत यह पहला प्रस्ताव था, जिसका शिलान्यास सितंबर 2023 में हुआ। 22,500 करोड़ रुपये से अधिक के कुल परिव्यय वाली इस परियोजना का निर्माण कार्य स्वीकृति के तुरंत बाद शुरू किया गया, जो रणनीतिक निवेश को गति देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
साणंद एटीएमपी संयंत्र पूरी तरह चालू होने पर लगभग पांच लाख वर्ग फुट का क्लीनरूम क्षेत्र उपलब्ध कराएगा और यह दुनिया के सबसे बड़े रेज़्ड-फ्लोर क्लीनरूम में से एक होगा। यह संयंत्र उन्नत डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी (डीआरएएम) और नैंड सेमीकंडक्टर वेफर्स को तैयार मेमोरी और स्टोरेज उत्पादों में परिवर्तित करेगा। इसका उद्देश्य एआई और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में तेजी से हो रही प्रगति के कारण मेमोरी और स्टोरेज समाधानों की बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया नई तकनीकों से जुड़ी आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करना चाहती है। भारत और अमेरिका जैसे दुनिया के दो बड़े लोकतंत्र इस दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं। हालिया समझौते और पहलें वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने में सहायक होंगी, विशेषकर महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकारें मिलकर उनके साथ खड़ी हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक विश्वसनीय, प्रतिस्पर्धी और प्रतिबद्ध साझेदार के रूप में उभर रहा है। यह संयंत्र देश में एक लचीला और आत्मनिर्भर प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
साणंद से शुरू हुआ यह वाणिज्यिक उत्पादन भारत में निर्मित पहले सेमीकंडक्टर मेमोरी मॉड्यूल के शिपमेंट का भी प्रतीक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विकास वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा और देश को विनिर्माण के एक भरोसेमंद केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत नई ऊंचाइयों को छुएगा और साणंद इस परिवर्तन का प्रमुख केंद्र बनेगा। यह केवल एक फैक्टरी का उद्घाटन नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता, वैश्विक साझेदारी और भविष्य की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव का प्रतीक है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार