
नई दिल्ली, 12 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मानवाधिकारों पर आधारित लघु फिल्मों की अपनी 11वीं वार्षिक प्रतियोगिता के 7 विजेताओं की घोषणा की।
आयोग के अनुसार आयोग की जूरी ने देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 24 भाषाओं और बोलियों में प्राप्त 526 प्रविष्टियों में से पुरस्कार विजेता फिल्मों का चयन किया। उत्तर प्रदेश की सुश्री सारिका जैन द्वारा निर्मित लघु फिल्म 'रानी' ने प्रथम केरल के अमल एस. की फिल्म 'मीनवाइल शी ने द्वितीय और तमिलनाडु की साई शशांक ताती की फिल्म 'द डिलीवरी' ने तृतीय पुरस्कार जीता।
'रानी' फिल्म एक युवा महिला के परिवर्तनकारी दृष्टिकोण से घरेलू कामगार महिलाओं की ओर से सामना किए जाने वाले वर्ग विभाजन असमानता और चुनौतियों को दर्शाती है तथा उनके मानवाधिकारों को प्रभावित करती है।
'मीनवाइल शी...' फिल्म लैंगिक रूढ़ियों और घरेलू हिंसा की चुनौतियों के बीच कामकाजी महिलाओं के मानवाधिकारों से संबंधित चिंताओं पर आधारित है। 'द डिलीवरी' फिल्म गिग कर्मचारियों के संघर्षों और उनके मानवाधिकारों से संबंधित चिंताओं को उजागर करती है।
इसके अलावा शिक्षा जेल सुधार बुजुर्ग आदिवासी दंपतियों के अधिकार और विधवाओं के अधिकारों से संबंधित मुद्दों को उजागर करने वाली चार फिल्मों को 'विशेष उल्लेख प्रमाण पत्र' के लिए चुना गया और 50 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने का भी निर्णय लिया गया।
इनमें पश्चिम बंगाल की फाल्गुनी भक्ता द्वारा निर्मित फिल्म 'मालती' उत्तर प्रदेश के रवि कर्णवाल द्वारा निर्मित फिल्म 'सेकंड चांस' महाराष्ट्र के दामोदर डी. पवार द्वारा निर्मित फिल्म 'डस्क ऑफ लाइफ और महाराष्ट्र के मनोज अप्पासो जनवेकर द्वारा निर्मित फिल्म 'भाग्यश्री' शामिल हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी