
नई दिल्ली, 12 मार्च (हि.स.)। राज्यसभा में गुरुवार को शून्यकाल में न्यायिक सुधारों का मुद्दा उठाते हुए द्रविण मुनेत्र कड़गम के सदस्य पी विल्सन ने सुप्रीम कोर्ट में क्षेत्रीय बेंचों की स्थापना की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों को आसानी से न्याय मिलेगा और न्याय व्यवस्था अधिक सुलभ बनेगी।
सांसद ने न्यायपालिका में सामाजिक प्रतिनिधित्व की कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में उच्च न्यायालयों में नियुक्त 593 न्यायाधीशों में से 473 यानी करीब 80 प्रतिशत अग्रणी समुदायों से हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल केवल एक महिला न्यायाधीश, दो धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों से और एक न्यायाधीश अनुसूचित जाति से हैं, जबकि अनुसूचित जनजाति से कोई भी न्यायाधीश नहीं है।
न्यायपालिका में व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व जरूरी है, ताकि यह देश के समाज की विविधता को सही रूप में प्रतिबिंबित कर सके।
इसके अलावा उन्होंने न्यायपालिका में न्यायाधीशों की कम संख्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि देश में जज-जनसंख्या अनुपात काफी कम है और उच्च न्यायालयों में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं, जबकि स्वीकृत पदों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है।
सांसद ने मांग की कि गंभीर आरोपों और ठोस सबूतों का सामना कर रहे न्यायाधीशों को निलंबित करने के लिए एक कानूनी तंत्र बनाया जाए, ताकि न्यायपालिका में जनता का विश्वास बना रहे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में महाभियोग की प्रक्रिया लंबी और बेहद जटिल है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी