
नई दिल्ली, 12 मार्च (हि.स.)। राज्य सभा सदस्य डॉ. मेधा विश्राम कुलकर्णी ने टेम्पल टाउन डेवलपमेंट फ्रेमवर्क के अंतर्गत आलंदी को शामिल करने की मांग
की। गुरुवार को सदन में विशेष उल्लेख के तहत हो रही चर्चा में भाग लेते हुए डॉ. मेधा विश्राम कुलकर्णी ने कहा कि महाराष्ट्र में स्थित मराठी संत ज्ञानेश्वर महाराज की पावन नगरी आलंदी को टेम्पल टाउन डेवलपमेंट फ्रेमवर्कमें शामिल किया जाए।
उन्होंने कहा कि आलंदी देश के सबसे श्रद्धेय तीर्थ स्थलों में से एक है और इसका आध्यात्मिक, सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक महत्व अत्यंत विशिष्ट है।
यहाँ प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं, विशेषकर आषाढ़ी और कार्तिकी वारी के दौरान, जिससे नागरिक बुनियादी ढांचे, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन, सार्वजनिक सुविधाओं और पर्यावरणीय संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
डॉ. मेधा विश्राम कुलकर्णी ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर आध्यात्मिक महत्व होने के बावजूद, आलंदी आज भी अनियोजित शहरीकरण और अपर्याप्त बुनियादी ढांचे के कारण गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। हाल ही में केंद्रीय बजट में मंदिर नगरों और टियर-II शहरों में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर दिया गया जोर इन लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान के लिए एक समयोचित और उपयुक्त नीति अवसर प्रदान करता है।
इस फ्रेमवर्क के अंतर्गत आलंदी को शामिल करने से तीर्थयात्रियों की सुविधाओं, स्वच्छता, सीवेज तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, नदी तट विकास, बाढ़ नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन, पार्किंग, सड़क संपर्क और धरोहर संरक्षण में केंद्रित निवेश संभव होगा।
इसके अलावा, आलंदी की पहचान इंद्रायणी नदी से गहराई से जुड़ी हुई है, जिसके लिए त्वरित पुनर्जीवन और प्रदूषण नियंत्रण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि टेम्पल टाउन का दर्जा मिलने से नदी के पुनर्स्थापन और शहरी विकास के साथ समन्वित योजना बन सकेगी, जिससे पर्यावरणीय स्थिरता और जनस्वास्थ्य सुनिश्चित होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी