
नई दिल्ली, 13 मार्च (हि.स.)। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोग्राम परियोजना में एक बड़ी कामयाबी मिली है। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड ने दो चूजों को जन्म दिया है। इस परियोजना के चौथे वर्ष में दो नए मेहमानों के साथ इनकी संख्या 70 हो गई है। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के दो चूजों के जन्म पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने राजस्थान वन विभाग को बधाई दी है।
भूपेन्द्र यादव ने एक्स पर तस्वीरों के साथ साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) ने अपने कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोग्राम के चौथे वर्ष में प्रवेश कर लिया है। इस सप्ताह राजस्थान के संरक्षण प्रजनन केंद्र में दो नए चूजों के जन्म के साथ, कैप्टिव अवस्था में पक्षियों की संख्या 70 हो गई है। यादव ने कहा कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नेतृत्व में देश इस परियोजना को बड़ी सफलता दिलाने की दिशा में सही राह पर है।
उन्होंने कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोग्राम परियोजना के तहत हासिल की गई यह एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यादव ने कहा कि राजस्थान के कैप्टिव ब्रीडिंग केंद्र में इस सप्ताह दो चूजों का जन्म हुआ, जिनमें से एक प्राकृतिक प्रजनन से और दूसरा कृत्रिम गर्भाधान से पैदा हुआ है। यादव ने इसे प्रजाति के संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस वर्ष पाले गए कुछ चूजों को जंगल में धीरे-धीरे छोड़ा जाएगा, जो इस परियोजना के लिए एक नई चुनौतीपूर्ण शुरुआत है।
उल्लेखनीय है कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (अर्डियोटिस नाइग्रिसेप्स) राजस्थान का राज्य पक्षी है। यह भारत का सबसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षी माना जाता है। यह विश्व स्तर पर उड़ने वाले सबसे भारी पक्षियों में से एक है तथा यह मुख्य रूप से राजस्थान के थार रेगिस्तान में पाया जाता है। कम संख्या में यह गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में मिलते हैं।
------------
हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी