
नई दिल्ली, 18 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत कामगारों की सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ी प्रगति देखने को मिली है। राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी द्वारा सदन में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने प्रदेश के ताजा आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में कुल 24 लाख 68 हजार 515 पंजीकृत सदस्य हैं, जिनमें से 5 लाख 14 हजार,741 सदस्य नियमित रूप से अपना अंशदान जमा कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सोलन और सिरमौर शीर्ष पर आंकड़ों का विश्लेषण करें तो प्रदेश के औद्योगिक जिलों में भविष्य निधि से जुड़ने वाले सदस्यों की संख्या सबसे अधिक है। सोलन जिला 16,20,735 पंजीकृत सदस्यों के साथ राज्य में सबसे आगे है, जहां 3.05 लाख से अधिक सक्रिय अंशदाई सदस्य हैं। इसी प्रकार सिरमौर में 2.60 लाख और राजधानी शिमला में 1.67 लाख पंजीकृत सदस्य हैं। अन्य जिलों में ऊना (1.13 लाख), कांगड़ा (70,982), मंडी (62,416), और कुल्लू (45,106) में भी पंजीकरण का स्तर बेहतर है। वहीं चम्बा, हमीरपुर, बिलासपुर और जनजातीय क्षेत्रों जैसे किन्नौर व लाहौल-स्पीति में सदस्यों की संख्या उनके भौगोलिक और औद्योगिक परिवेश के अनुरूप दर्ज की गई है।
केंद्रीय मंत्री ने सदन को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि ईपीएफओ में अब दावों के निपटारे की गति में क्रांतिकारी सुधार आया है। डिजिटल इंडिया की पहल के चलते अब भविष्य निधि के दावों को औसतन मात्र 8 दिनों के भीतर निपटाया जा रहा है। इस व्यवस्था से न केवल कागजी कार्रवाई में कमी आई है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित हुई है।
शोभा करंदलाजे ने बताया कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार हुआ है। इससे सोशल सिक्योरिटी अकाउंट्स के संचालन में ईपीएफओ को काफी मदद मिली है। ऑनलाइन तकनीक के माध्यम से अब कामगारों को अपने पीएफ खातों की जानकारी और निकासी के लिए जटिल प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ता, जिससे दक्षता बढ़ी है और लाखों कर्मचारियों को समयबद्ध तरीके से उनके वित्तीय लाभ मिल रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया