
नई दिल्ली, 19 मार्च (हि.स.)। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को ‘वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 के लिए लघु जल विद्युत (एसएचपी) विकास योजना को मंजूरी दी है। सरकार के इस कदम को काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) ने समयोचित कदम बताया है। सीईईडब्ल्यू की रिसर्चर भावना त्यागी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 'लघु जल विद्युत (एसएचपी) विकास योजना की घोषणा एक समयोचित कदम है, जो अक्षय ऊर्जा मिश्रण को विविध बनाने के साथ-साथ इसकी अप्रयुक्त क्षमता को सामने लाने का भरोसा दिलाता है। स्वच्छ ऊर्जा से आगे, ये लघु जल विद्युत परियोजनाएं स्थानीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, खास तौर पर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
उन्होंने कहा कि सीईईडब्ल्यू के अनुमानों के अनुसार ये परियोजनाएं अपने पूरे जीवनचक्र में प्रति मेगावाट लगभग 13.84 नौकरियां सृजित कर सकती हैं। इस क्षमता को निरंतर निजी निवेश में बदलने के लिए, इस क्षेत्र को एक सुव्यवस्थित नियामकीय ढांचे की जरूरत है। इन परियोजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने में सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, तार्किक ट्रांसमिशन शुल्क, 'फ्री-पावर लेवी' की समाप्ति और 'मस्ट-रन' दर्जा देने जैसे प्रमुख सहायक कारकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी