कभी सत्ता के प्रतीक रहे नॉर्थ और साउथ ब्लॉक अब संस्कृति के केंद्र बन चुके हैं : प्रधानमंत्री मोदी

युगवार्ता    19-Mar-2026
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आईजीएनसीए) के 39वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रम


नई दिल्ली, 19 मार्च (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के 39वें स्थापना दिवस पर गुरुवार को कहा कि जो नॉर्थ और साउथ ब्लॉक कभी सत्ता के प्रतीक थे, वे अब संस्कृति के केंद्र बन चुके हैं।

सांस्कृतिक उत्सव की शुरुआत से पहले आईजीएनसीए ट्रस्ट के अध्यक्ष रामबहादुर राय के नेतृत्व में 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने आज सुबह प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ का उल्लेख किया और कहा कि 'स्व' की भावना के साथ भारत को समझना और इतिहास-बोध को जागृत करना समय की मांग है।

राम बहादुर राय ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में आईजीएनसीए एक अभिजात संस्था से निकलकर हर भारतीय का लोकतांत्रिक सांस्कृतिक केंद्र बन गया है और देश के लोगों के लिए एक लोकतांत्रिक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ है।

दर्शकों को 19-21 मार्च तक चलने वाले इस समारोह में भारतीय कला, दर्शन और परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलने वाला है।

उत्सव के पहले दिन आज की शाम 'पद्म विभूषण' डॉ. सोनल मान सिंह के नाम रही। उन्होंने अपने विशेष कार्यक्रम नाट्य कथा-देवी के माध्यम से शक्ति उपासना और नाट्यशास्त्रीय सौंदर्य की ऐसी प्रस्तुति दी कि उपस्थित जनसमूह भाव-विभोर हो उठा।

दूसरे दिन 20 मार्च को सायं 7 बजे विख्यात सांस्कृतिक चिंतक भरतनाट्यम कलाकार एवं ‘पद्म विभूषण’ डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम “भगवद गीता” पर आधारित विशेष नृत्य-नाट्य प्रस्तुति देंगी, जिसमें गीता के दार्शनिक संदेशों को नृत्य और भावाभिव्यक्ति के माध्यम से सजीव किया जाएगा।

समारोह का तीसरा दिन 21 मार्च भारत की विविध लोक परम्पराओं और मार्शल आर्ट्स को समर्पित रहेगा। कार्यक्रम की शुरुआत सायं 4 बजे असम के बागुरुम्बा नृत्य से होगी। इसके बाद हिमाचल प्रदेश का नाटी नृत्य, गुजरात का तलवार रास, केरल का प्राचीन मार्शल आर्ट कलारीपयट्टु, मध्य प्रदेश की कबीर गायन परम्परा तथा अंत में सूफी एवं कबीर गायन की आकर्षक प्रस्तुतियां होंगी।

स्थापना दिवस के पहले दिन तीन प्रमुख प्रदर्शनियों का उद्घाटन किया गया, जो दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इनमें कलादृष्टि (2016-2026): संस्थान की पिछले एक दशक की गौरवपूर्ण यात्रा को दर्शाती फोटोग्राफिक प्रदर्शनी, ब्रीदिंग हाइड्स: आंध्र प्रदेश की पारंपरिक चमड़ा कठपुतली कला पर आधारित आख्यान, थेवा कला: राजस्थान की दुर्लभ स्वर्णकारी तकनीक पर केंद्रित प्रदर्शनी शामिल हैं।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ बौद्धिक विमर्श के अंतर्गत 'कलाकोश' प्रभाग द्वारा बहुप्रतीक्षित पुस्तक शृंखला ‘कलातत्त्वकोश’ के आठवें खंड का लोकार्पण किया गया। विद्वानों ने इसे भारतीय ज्ञान परंपरा का एक अमूल्य दस्तावेज बताया जो कला की मूलभूत अवधारणाओं को समझने में सहायक सिद्ध होगा।

इस प्रतिनिधिमंडल में डॉ. सोनल मानसिंह (पूर्व सांसद), डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम, प्रसून जोशी, हर्षवर्धन नेओटिया, डॉ. भारत गुप्त, डॉ. संध्या पुरेचा, देवेंद्र शर्मा, रति विनय झा, प्रो. निर्मला शर्मा, बिरद याज्ञिक, प्रो. कुलदीप अग्निहोत्री और वंदना जैन शामिल रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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