अमेरिकी हथियार भंडार पर विवाद, पश्चिम एशिया युद्ध की लागत और रणनीति पर नई बहस

युगवार्ता    19-Mar-2026
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वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क, 19 मार्च (हि.स.)। अमेरिका की रक्षा और विदेश नीति को लेकर एक बार फिर तीखी बहस शुरू हो गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन पर आरोप लगाया है कि उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों ने देश के हथियार भंडार को कमजोर कर दिया। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध खर्च को लेकर भी दबाव में है।

रक्षा मंत्री हेगसेथ के अनुसार 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद बाइडेन प्रशासन ने यूक्रेन को बड़े पैमाने पर सैन्य सहायता दी, जिससे अमेरिकी भंडार पर असर पड़ा। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सहायता में मुख्य रूप से जमीन से इस्तेमाल होने वाले हथियार, गोला-बारूद और सैन्य वाहन शामिल थे।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिका ने यूक्रेन को टॉमहॉक जैसी महंगी और अत्याधुनिक मिसाइलें बड़ी संख्या में नहीं दीं। इसके विपरीत, हालिया मिडिल ईस्ट अभियानों में अमेरिका ने अधिक उन्नत हथियारों का उपयोग किया है, जिससे रणनीतिक प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

युद्ध की बढ़ती लागत पर चिंता

इसी बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अमेरिका के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पेंटागन ने इस अभियान को जारी रखने के लिए करीब 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त फंड की जरूरत जताई है और प्रस्ताव व्हाइट हाउस को भेजा गया है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हेगसेथ ने कहा, “बुरे तत्वों को खत्म करने में खर्च होता है,” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 200 अरब डॉलर का आंकड़ा अंतिम नहीं है और इसमें बदलाव संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह अमेरिका के रक्षा बजट पर बड़ा दबाव डाल सकता है।

मीडिया कवरेज पर रक्षा मंत्री की नाराजगी

रक्षा मंत्री ने युद्ध की मीडिया कवरेज पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कुछ मीडिया संस्थानों को ‘पक्षपाती’ बताते हुए आरोप लगाया कि वे अमेरिकी सैन्य सफलता को कम करके दिखा रहे हैं और युद्ध के खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं।

हेगसेथ के मुताबिक, अमेरिका इस संघर्ष में “अपनी शर्तों पर निर्णायक बढ़त” बना रहा है। उन्होंने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता और रक्षा उद्योग को कमजोर करना है, साथ ही उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना भी प्राथमिकता में शामिल है।

तेल प्रतिबंधों में ढील की संभावना

इस बीच ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए अमेरिका अपनी नीति में लचीलापन दिखा सकता है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि ट्रम्प प्रशासन ईरानी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने पर विचार कर रहा है।

उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि अगले 10 से 14 दिनों तक तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए ईरानी तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है, भले ही अमेरिका का सैन्य अभियान जारी रहे। यह कदम वैश्विक बाजार में कीमतों को संतुलित रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

इन घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि अमेरिका एक साथ कई मोर्चों पर रणनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है—चाहे वह सैन्य संसाधनों का प्रबंधन हो, युद्ध की लागत हो या वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नियंत्रण। आने वाले दिनों में इन नीतिगत फैसलों का असर न केवल अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

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