वॉशिंगटन/तेल अवीव/बेरूत, 19 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और इजराइल की रणनीति में अंतर खुलकर सामने आ गया है। अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस प्रमुख तुलसी गबार्ड ने स्पष्ट किया है कि ईरान के खिलाफ दोनों देशों के लक्ष्य अलग-अलग हैं, जिससे इस युद्ध के स्वरूप और आगे की दिशा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
अमेरिका और इजराइल के अलग-अलग लक्ष्य
तुलसी गबार्ड के अनुसार, इजराइल का मुख्य उद्देश्य ईरान की शीर्ष नेतृत्व संरचना को निशाना बनाना है और वह इस दिशा में कई बड़े नेताओं पर हमले कर चुका है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की प्राथमिकता ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, खासकर उसकी बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली, उत्पादन ढांचा और नौसेना।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका सीधे तौर पर इजराइल के सैन्य अभियानों में शामिल नहीं है, बल्कि केवल खुफिया जानकारी साझा कर रहा है। गबार्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें यह नहीं पता कि इजराइल भविष्य में ईरान के साथ किसी संभावित समझौते का समर्थन करेगा या नहीं।
कैस्पियन सागर में इजराइल की बड़ी कार्रवाई
इस बीच इजराइल ने संघर्ष को और विस्तार देते हुए पहली बार कैस्पियन सागर में ईरान के नौसैनिक ठिकानों पर हमला किया है। इजराइली सेना के मुताबिक, वायुसेना ने एक प्रमुख नौसेना बंदरगाह को निशाना बनाया, जहां कई युद्धपोत और पेट्रोल बोट्स तैनात थे।
हमले में एयर डिफेंस सिस्टम, एंटी-सबमरीन हथियारों से लैस जहाजों और मरम्मत सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचाया गया। इसके अलावा नौसैनिक गतिविधियों के केंद्रीय मुख्यालय को भी टारगेट किया गया। इजराइल का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की समुद्री ताकत को कमजोर करना है, ताकि उसकी रणनीतिक क्षमता घटाई जा सके।
लेबनान में बढ़ती तबाही
इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच जारी संघर्ष का असर लेबनान में गंभीर रूप से दिखाई दे रहा है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 2 मार्च से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक 1,001 लोगों की मौत हो चुकी है।
मृतकों में 79 महिलाएं, 118 बच्चे और 40 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं, जबकि 2,500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है, जिससे मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि अमेरिका और इजराइल के बीच रणनीतिक मतभेद, ईरान पर बढ़ते हमले और लेबनान में बढ़ती हिंसा मिडिल ईस्ट को एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की ओर धकेल सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाते हैं या हालात और गंभीर होते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय