सार्थक प्रगति के लिए मजबूत प्रशासन और निरंतर सार्वजनिक निवेश का तालमेल अनिवार्य है: डॉ. पीके मिश्रा

युगवार्ता    22-Mar-2026
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प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा समेत अन्य लोग मौजूद


नई दिल्ली, 22 मार्च (हि.स.)। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने विश्व जल दिवस के अवसर पर रविवार को कहा कि सार्थक प्रगति के लिए मजबूत प्रशासन, बेहतर संस्थागत क्षमता और निरंतर सार्वजनिक निवेश का तालमेल अनिवार्य है।

डॉ मिश्रा ने यह बात आज नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में जल सुरक्षा और आर्थिक प्रगति के अंतर्संबंधों पर केंद्रित पुस्तक 'वॉटर, नेचर, प्रोग्रेस: सॉल्यूशंस फॉर अ न्यू इंडिया' के लोकार्पण पर कही। इसके लेखक विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक परमेश्वरन अय्यर, सीईईडब्ल्यू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अरुणाभा घोष और विश्व बैंक मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. रिचर्ड दमानिया हैं। इस पुस्तक को हार्परकॉलिन्स पब्लिशर्स इंडिया ने प्रकाशित किया है।

डॉ मिश्रा ने कहा, जैसे-जैसे भारत 'विकसित भारत 2047' की ओर बढ़ रहा है, हमारी कृषि, शहरी जीवन और ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह से जल प्रबंधन पर निर्भर करेगी। यह पुस्तक नीति, अर्थशास्त्र और क्रियान्वयन का एक दुर्लभ संगम है जो जल को विकास की बाधा के बजाय एक अवसर में बदलने का मार्ग प्रशस्त करती है।

वी. अनंत नागेश्वरन (मुख्य आर्थिक सलाहकार) ने कहा कि पानी केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था का बड़ा कारक है। यदि प्रबंधन सही न हो तो गर्म होती दुनिया में पानी भारत की सबसे कमजोर कड़ी बन सकता है।

परमेश्वरन अय्यर ने कहा कि पाइप और पंप लगाए जा सकते हैं लेकिन संस्थानों और पारदर्शिता के बिना व्यवस्था नहीं चल सकती। हमें जल को केवल एक अधिकार नहीं बल्कि एक संरक्षित साझा संसाधन बनाना होगा।

डॉ. घोष ने 'निकालने और बहा देने' के पुराने मॉडल को छोड़कर 'सर्कुलर इकोनॉमी' (पुनर्उपयोग) अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पानी ही तय करेगा कि भविष्य में हमारे शहर कहाँ बसेंगे और उद्योग कितने सफल होंगे।

डॉ. दमानिया ने 'ग्रीन वॉटर' (मिट्टी की नमी) के महत्व को saसमझाते हुए कहा कि भूजल दोहन के बजाय मृदा स्वास्थ्य और वन संरक्षण से कृषि उत्पादकता को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।

हार्परकॉलिन्स के कार्यकारी प्रकाशक उदयन मित्रा ने कहा कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग की दिशा में एक ऐतिहासिक दस्तावेज है।

विश्व बैंक के ग्लोबल डायरेक्टर सरोज कुमार झा और गेट्स फाउंडेशन के अध्यक्ष हरि मेनन जैसे दिग्गजों ने भी इस पुस्तक की सराहना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह किताब भारत में 'नई हरित क्रांति' के लिए मार्गदर्शक साबित होगी।

पुस्तक में इस विडंबना को सामने रखा गया है कि भारत के पास दुनिया की 18 प्रतिशत आबादी है लेकिन ताजे जल के संसाधनों का केवल 4 हिस्सा। इसी अंतर को पाटने के लिए लेखकों ने डेटा-संचालित नीतियों और वास्तविक दुनिया के उदाहरणों को सामने रखा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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