लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर बिलाल की ईद के दिन हत्या

युगवार्ता    22-Mar-2026
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लश्कर-ए-तैयबा कमांडर बिलाल आरिफ सराफी (फाइल फाेटाे)


इस्लामाबाद, 22 मार्च (हि.स.)। पाकिस्तान के मुरीदके में शुक्रवार काे ईद की नमाज के बाद आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर बिलाल आरिफ सराफी की गोली मार कर हत्या कर दी गई। घटना ‘मरकज तैयबा’ परिसर में हुई, जिसे पाकिस्तान के अशांत पंजाब प्रांत स्थित आतंकवादी समूहों के सबसे सुरक्षित ठिकानों में गिना जाता है।

मीडिया रिपाेर्टस के अनुसार, आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडरों में से एक बिलाल आरिफ सराफी काे मुरीदके में ईद की नमाज़ के बाद गोली मारकर और कई बार चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। उसकी हत्या 'मरकज तैयबा' परिसर के अंदर की गई, जिसे लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय माना जाता है। यह घटना शुक्रवार काे ईद की सामूहिक नमाज़ के बाद हुई। उसे बहुत करीब से गोली मारी गई और कई बार चाकू से वार किए गए, जिससे उसकी माैत हाे गई।

मरकज तैयबा, लश्कर-ए-तैयबा का वही मुख्यालय है जिसे मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने नष्ट कर दिया था। हमले के बाद के महीनों में 1.09 एकड़ के इस परिसर का दोबारा निर्माण किया गया।

मीडिया से बातचीत में चश्मदीदों ने बताया कि यह हत्या सुनियोजित थी और इसे बहुत पेशेवर तरीके से अंजाम दिया गया। लाेगाें ने दावा किया कि दो हमलावरों में एक बंदूकधारी ने सराफी को गोली मारी, जबकि दूसरे हमलावर ने उसपर कई बार चाकू से वार किए। घटना के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

एक खुफिया सूत्र ने बताया कि उसके ईद की नमाज़ अदा करने के ठीक बाद लश्कर-ए-तैयबा मुख्यालय परिसर के अंदर उसे निशाना बनाया। इससे पता चलता है कि हमलावर सराफी की गतिविधियों से अच्छी तरह वाकिफ थे और उनकी लश्कर-ए-तैयबा मुख्यालय तक पहुँच थी।

फिलहाल, हमलावरों के बारे में काेई जानकारी नहीं मिली है। शुरुआती रिपोर्ट से पता चलता है कि सराफी पर हमला करने वाले उसके अपने ही आतंकवादी समूह के हो सकते हैं। इसके साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि सराफ़ी की हत्या के पीछे निजी दुश्मनी का भी कोई पहलू हो सकता है।

बताया जाता है कि बिलाल सराफी साल 2005 से आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा जुड़ा था। वह कथित तौर पर संगठन के लिए भर्ती और धन जुटाने का काम संभाल रहा था। जाँच अधिकारियों ने दावा किया है कि सराफी नियमित रूप से लश्कर-ए-तैयबा में भर्ती के लिए युवाओं की पहचान और उनकी तलाश कर रहा था।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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