हैदराबाद की मूसी रिवरफ्रंट परियोजना पर देशभर से विरोध, पांच साै से अधिक लोगों ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

युगवार्ता    24-Mar-2026
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मूसी रिवरफ्रंट के विरोध में सीएम को पत्र


मूसी रिवरफ्रंट के विरोध में सीएम को पत्र


हैदराबाद में मूसी रिवरफ्रंट डेवलपमेंट परियोजना की व्यापक समीक्षा की मांग तेजसरकार बड़े पैमाने के बदले विस्थापन को न्यूनतम करने पर दे ध्यान: एमजेएम

हैदराबाद, 24 मार्च (हि.स.)। राज्य में मूसी रिवरफ्रंट डेवलपमेंट परियोजना के विराेध में देशभर के पांच साै से अधिक सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और पर्यावरणविदों ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को एक खुला पत्र लिखकर विराेध जताया है। इन लाेगाें ने राज्य की कांग्रेससरकार से इस परियोजना की व्यापक समीक्षा करने और नदी किनारे रह रहे लोगों के विस्थापन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। यह पत्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं काे भी भेजा गया है।

मूसी जन आंदोलन (एमजेए) ने मूसी रिवरफ्रंट डेवलपमेंट परियोजना के विराेध में सामूहिक हस्ताक्षर अभियान चलाया गया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ यह पत्र कांग्रेस के शीर्ष नेता मल्लिकार्जुन खगड़े, राहुल गांधी, जयराम रमेश सहित तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन के अलावा सरकार की ओर से इस परियाेजना की निगरानी के लिए गठित कैबिनेट उप-समिति के अध्यक्ष व राज्य के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क को भी भेजा गया है। इस पत्र में 11 बिंदुओं पर सरकार की परियोजना संबंधी नीति की आलोचना की गई है। पत्र में कहा गया है कि परियोजना की निगरानी के लिए गठित कैबिनेट उप-समिति केवल “एक त्रुटिपूर्ण मॉडल को लागू करने” तक सीमित न रहे, बल्कि नदी पुनर्जीवन के लिए वैज्ञानिक और लोकतांत्रिक विकल्पों पर गंभीरता से विचार करे।

इस पत्र पर हस्ताक्षरकर्ताओं ने विधानसभा में मुख्यमंत्री की ओर से परियाेजना के प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के आश्वासन का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार को पहले बड़े पैमाने पर विस्थापन को न्यूनतम करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि अनावश्यक भूमि अधिग्रहण के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

एमजेए के अनुसार, इस मुद्दे की तात्कालिकता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि परियोजना के पहले चरण (फेज-I) के तहत “गांधी सरोवर” की आधारशिला 28 मार्च या 2 अप्रैल, 2026 को रखे जाने की चर्चा है, जिसमें केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भी भाग लेने की संभावना है। संगठन ने बताया कि 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 12 मार्च को उपमुख्यमंत्री विक्रमार्का से मुलाकात कर अपनी मांगें रखी थीं। इसके बाद 13 मार्च को आयोजित संबंधित कार्यक्रम में उन्होंने भाग नहीं लिया। एमजेए ने मांग की है कि पूरे प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अंग्रेजी, तेलुगु और उर्दू में सार्वजनिक की जाए और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए कम से कम 60 दिन का समय दिया जाए। इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण से जुड़े नोटिफिकेशन वापस लेने और 2013 के भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन कानून को लागू करने की भी मांग की गई है। इस पत्र पर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर, पर्यावरणविद् सागर धारा, शबनम हाशमी, शिक्षाविद् राम मेलकोटे सहित कई प्रमुख हस्तियों ने भी हस्ताक्षर किए हैं।

उल्लेखनीय है कि मूसी रिवर फ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की ड्रीम परियोजना है। जिसको लेकर शपथ ग्रहण के बाद से ही मुख्यमंत्री अपनी प्रतिबद्धता जताते रहते हैं। यहां तक कि विदेश दौरे में ही उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए निवेशकों को आमंत्रित किया था। राज्य सरकार ने हाल में पेश किए अपने बजट में भी इस परियोजना के लिए 1500 करोड़ रुपये का आवंटन किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Dev Kumar Pukhraj

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