जलवायु प्रतिबद्धताओं को लेकर नए 'राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान एक महत्वपूर्ण संकेतः सीईईडब्ल्यू

युगवार्ता    26-Mar-2026
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डॉ. अरुणाभा घोष, सीईओ, सीईईडब्ल्य़ू


नई दिल्ली, 26 मार्च (हि.स.)। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन को सूचित किए जाने वाले भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (2031-2035) को मंजूरी देने के केंद्र के फैसले को महत्वपूर्ण बताया है।

सीईईडब्ल्यू के सीईओ डॉ. अरुणाभा घोष ने गुरुवार को एक बयान में कहा, ऐसे समय में जब संघर्ष और ऊर्जा सुरक्षा की चिंताएं विभिन्न देशों को जलवायु प्रतिबद्धताओं से पीछे खींच रही हैं, भारत के नए 'राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान एक महत्वपूर्ण संकेत हैं। 2035 तक गैर-जीवाश्म ईंधन की बिजली क्षमता में 60 प्रतिशत की लक्षित हिस्सेदारी बताती है कि भारत ने जहां बिजली क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने की अपनी महत्वाकांक्षा को बढ़ाया है, वहीं उसने अपने करोड़ों नागरिकों के लिए ऊर्जा सुरक्षा और किफायती बनाए रखने पर भी जोर दिया है।

उन्होंने बताया कि भारत का पावर मार्केट (बिजली बाजार) तेजी से विकसित हो रहा है। अगर यही गति जारी रही और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं में कमी आई तो हमारा अनुमान है कि भारत अपने लक्ष्य से आगे निकल जाएगा, जैसा कि ऐसा पहले कई बार किया है।

अब 47 प्रतिशत की उत्सर्जन तीव्रता का लक्ष्य वैश्विक अर्थव्यवस्था की मौजूदा अनिश्चितताओं के बीच प्रगति को दर्शाता है। नवाचार पर जोर देने का अर्थ है कि ग्रीन हाइड्रोजन, दुर्लभ खनिज, कार्बन कैप्चर और उन्नत बैटरियां न केवल बिजली क्षेत्र, बल्कि उससे आगे भारत के ऊर्जा संक्रमण को सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण होंगी। भारत ने कार्बन सिंक के निर्माण को भी काफी हद तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, जो कृषि-वानिकी, मृदा स्वास्थ्य और जैव विविधता संरक्षण के लिए निवेश के नए रास्ते खोल सकता है।

इसके अलावा, लचीले बुनियादी ढांचे और अनुकूलन पर बहुत अधिक मजबूती से जोर दिया जाना दर्शाता है कि भारत ने जलवायु संबंधी सुभेद्यताओं- अनियमित वर्षा हो, लू (हीटवेव), तटीय जोखिम और विकास, आजीविका तथा बुनियादी ढांचे के संरक्षण की जरूरत को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है।

डॉ. अरुणाभा घोष ने कहा कि मैंग्रोव की पुनर्बहाली और तटीय सुरक्षा, चक्रवात और तूफान के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और राज्यों में 'हीट एक्शन प्लान' के विस्तार जैसे उपाय बताते हैं कि अनुकूलन और लचीलापन भारत की जलवायु रणनीति के केंद्रीय स्तंभ बन रहे हैं। साथ ही, मिशन लाइफ चक्रीय और जैव-अर्थव्यवस्था में अवसर उपलब्ध कराता है और यह दिखाता है कि कैसे सतत जीवनशैली नए विकास और मूल्य सृजन को रफ्तार दे सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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