
- खाड़ी देशों से लोगों को स्वदेश लाने का कोई प्रस्ताव नहीं
नई दिल्ली, 27 मार्च (हि.स.)। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि घरेलू गैस एलपीजी से भरे चार जहाज होर्मुज जलसंधि के जरिए सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गए हैं। शेष बचे 20 जहाजों को लाने के लिए प्रयास जारी हैं। इस सिलसिले में सभी संबंधित देशों के साथ बातचीत चल रही है ताकि इन जहाजों को सुरक्षित रूप से लाया जा सके।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए व्यापक नजरिया अपनाया जा रहा है। देश के 140 करोड़ लोगों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए प्रयास जारी हैं। हम बाजार के हालात और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निगरानी बनाए हुए हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के हालात के मद्देनजर उस क्षेत्र के देशों से भारतीय नागरिकों को स्वदेश लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन देशों में हवाई उड़ानें बाधित नहीं हैं। वहां स्थित भारतीय दूतावास हवाई उड़ानों के बारे में जानकारी साझा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि होर्मुज जलसंधि एक अंतरराष्ट्रीय नौवहन क्षेत्र है। भारत निर्बाद नौवहन का समर्थक है।
नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास की ओर से आर्थिक योगदान हासिल करने के संबंध में पूछे गये एक सवाल के उत्तर में प्रवक्ता ने कहा कि इस संबंध में विदेशी दूतावासों पर कोई रोक नहीं है। हम देखेंगे कि इस धनराशि का किस तरह इस्तेमाल होता है।
पाकिस्तान की सरकार द्वारा वहां के शिया नेताओं के साथ बातचीत के दौरान आपत्तिजनक शब्दावली का प्रयोग किये जाने के बारे में उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश में शिया समुदाय सहित अल्पसंख्यक लोगों के साथ किस तरह का अनुचित व्यवहार होता है इससे सभी परिचित हैं।
पश्चिम एशिया के संघर्ष के सिलसिले में ब्रिक्स संगठन की भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के साथ दो सदस्य देश (ईरान और संयुक्त अरब अमीरात) जुड़े हुए हैं, इसलिए संघर्ष के संबंध में आम राय कायम करना दुष्कर है।
उल्लेखनीय है कि भारत इस वर्ष ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मेजबान है। यह सम्मेलन अगले कुछ महीनों में आयोजित होना है।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की ओर से ‘नरसंहार दिवस’ (25 मार्च) को दिए गए संबोधन पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना द्वारा वर्ष 1971 में ‘ऑपरेशन सर्च लाइट’ के दौरान किए गए भयानक अत्याचारों से सभी परिचित हैं। इस नरसंहार में लाखों बांग्लादेश नागरिकों का योजनाबद्ध तरीके से नरसंहार किया गया तथा महिलाओं के साथ यौन अपराध किये गये। बांग्लदेश के लाखों लोगों ने भारत में शरण ली। इन अत्याचारों ने विश्व चेतना को झकझोर कर रख दिया। बावजूद इसके पाकिस्तान इन अपराधों को लगातार नकारता रहा है। भारत इस संबंध में बांग्लदेश द्वारा की जा रही न्याय की मांग का समर्थन करता है।
प्रवक्ता ने कहा कि बांग्लादेश में नई सरकार के पद ग्रहण के समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला शामिल हुए थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष के जरिए नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान को बधाई संदेश भेजा था। पत्र में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का भी उल्लेख था। प्रवक्ता ने कहा कि भारत बांग्लादेश के साथ अपने विविधतापूर्ण संबंधों को और मजबूत बनाने का इच्छुक है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के जी-7 विदेश मंत्री सम्मेलन में भाग लेने के बारे में प्रवक्ता ने कहा कि विदेश मंत्री सम्मेलन में भाग लेने के लिए फ्रांस की राजधानी पेरिस में हैं। उन्होंने वहां फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, जापान और ब्राजील के विदेश मंत्रियों से बातचीत की है। विदेश मंत्री की अमेरिका के विदेश मंत्री के साथ संभावित मुलाकात के बारे में उन्होंने कहा कि अभी पेरिस में समय बाकी है। विदेश मंत्री सम्मेलन में जयशंकर के संबोधन के बारे में उन्होंने कहा कि जयशंकर ने विश्व प्रणाली के संचालन के संबंध में सुरक्षा परिषद सधारों पर जोर दिया है। उन्होंने शांति कायम करने के अभियानों तथा मानवीय सहायता पहुंचाये जाने की प्रक्रिया को चुस्त बनाने पर जोर दिया। विदेश मंत्री ने विभिन्न देशों की खाद्य, ईंधन और उर्वरक संबंधी चिंताओं के निराकरण के लिए कदम उठाये जाने का भी आग्रह किया। पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति के कारण पूरी दुनिया पर असर पड़ रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार