
नई दिल्ली, 27 मार्च (हि.स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को राज्यसभा को बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए शुष्क खेती, जलवायु अनुकूल किस्मों से लेकर सिंचित क्षेत्रों तक किसानों की आय को बढ़ाने के लिए पूरी ताकत से काम कर रही है। शुष्क क्षेत्र अब कृषि उत्पादन के नए केंद्र बन रहे हैं। जलवायु अनुकूल फसल किसानों की आय बढ़ा रही है।
राज्यसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल में शिवराज सिंह चौहान शुष्क खेती, जलवायु‑अनुकूल किस्मों, श्री अन्न (मिलेट्स), पंजाब‑महाराष्ट्र जैसे कृषि‑प्रधान राज्यों की चुनौतियों और किसानों की आय बढ़ाने को लेकर पूछे गए प्रश्नों और पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे।
महाराष्ट्र के शुष्क जिलों को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कभी भारत को खाद्यान्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आयात पर निर्भर रहना होता था। देश पीएल‑480 योजना से मिलने वाले गेहूं पर निर्भर था। अब स्थिति पूरी बदल चुकी है, देश के अन्न भंडार भरे हैं और चावल उत्पादन में भारत चीन को पछाड़ कर दुनिया में नंबर एक स्थान पर पहुंच चुका है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने मराठवाड़ा के 23 शुष्क जिलों के लिए 808 जलवायु के अनुसार संवेदनशील किस्मों का बड़ा अभियान चलाया है।
शिवराज सिंह ने बताया कि महाराष्ट्र के 23 जिले शुष्क भूमि वाले हैं और 13 जिले वर्षा‑आश्रित हैं, जिनमें छत्रपति संभाजी नगर, जलना, बीड, लातूर, उस्मानाबाद, नांदेड़, परभणी, हिंगोली जैसे मराठवाड़ा के जिले शामिल हैं। कृषि मंत्रालय जलवायु अनुकूल फसलों और खेती के लिए इन इलाकों के लिए विशेष परियोजनाएं तैयार की हैं, इन्हें कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से किसानों तक निरंतर पहुंचाया जा रहा है। इसमें महाराष्ट्र के लिए 808 उच्च उपज देने वाली जलवायु‑ प्रतिरोधक फसल किस्मों में 332 अनाज, 122 तिलहन, 61 दलहनी, 198 रेशेदार फसलें, 19 गन्ना और 8 अन्य संभावित फसलों की किस्में हैं जो विशेष रूप से शुष्क और वर्षा‑निर्भर खेती के लिए अनुकूल हैं। इन किस्मों के उपयोग से मराठवाड़ा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आजीविका में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने अब तक 3,236 जलवायु अनुकूल किस्में और 651 जिलों के लिए कृषि आकस्मिक योजनाएं बनाई गई हैं।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 10–11 वर्षों में 3,236 जलवायु‑अनुकूल किस्मों का विकास किया है, जो कम पानी, अधिक तापमान और अधिक सर्दी जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा उत्पादन देने में सक्षम हैं। इन किस्मों के माध्यम से सूखा, बाढ़, पाला, लू जैसी चरम मौसम स्थितियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक समाधान किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश के 651 जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजनाएं तैयार की गई हैं, जिनमें हीट वेव, कोल्ड वेव, ओलावृष्टि और अन्य अत्यधिक मौसम घटनाओं के प्रबंधन के स्पष्ट प्रावधान शामिल हैं। साथ ही, सतत कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन और अन्य माध्यमों के जरिए टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने, बरसात सिंचित क्षेत्र विकास, खेत पर जल प्रबंधन और मृदा स्वास्थ प्रबंधन जैसे तीन प्रमुख घटकों पर विशेष बल दिया जा रहा है।
सदस्यों द्वारा पंजाब को लेकर पूछे गए प्रश्नों के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य में पराली प्रबंधन से लेकर मृदा स्वास्थ तक कृषि के विकास में महत्वपूर्ण यात्रा तय की है। हरित क्रांति के दौर से ही पंजाब के किसानों ने अपने परिश्रम से देश के अन्न भंडार भरे, देश की भुखमरी को मिटाया और पूरे देश के लिए प्रेरणा का काम किया। जिसके लिए वह पंजाब और पंजाब के किसानों को हृदय से प्रणाम करते हैं। उन्होंने साथ ही यह चिंता भी साझा की कि अत्यधिक उत्पादन के दबाव, अधिक पानी वाली किस्मों और रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग के कारण पंजाब सहित कई क्षेत्रों में मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हुई है और नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम तथा सेकेंडरी और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स के स्तर में गिरावट देखी जा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा यद्यपि यह चिंता का विषय पर है पर इसके लिए किसान कभी दोषी नहीं बल्कि पंजाब के किसान स्वयं पराली प्रबंधन व नई पद्धतियां अपनाने में आगे हैं। उन्होंने अपने 27 नवम्बर 2025 के मोगा जिले के दौरे का उल्लेख किया, जहां रन सिंह वाला गांव और आसपास के गांवों में धान की सीधी बुवाई बिना जुताई वाली तकनीकों से बिना पराली जलाए खेती का सफल प्रयोग होते देखा गया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केरल में कृषि को लेकर पूछे गए तल्ख सवाल के जवाब में कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सदन में राज्य के चुनावों के मद्दे नजर पूछे गए सवाल के जवाब में स्पष्ट किया केरल में किस तरह से सरकार का जोर किसान हितैषी फैसलों को लागू कराने का कहा है।
केंद्रीय मंत्री ने विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाए गए आर्थिक और न्यूनतम समर्थन मूल्य संबंधी सवालों के जवाब में आंकड़ों के साथ बताया कि श्री अन्न को बढ़ावा देने के लिए 2015 से 2025 के बीच अनेक कदम उठाए गए हैं, जिनमें नई किस्में जारी करना, बीज उत्पादन को प्रोत्साहन, रियायती बीज वितरण और एमएसपी में उल्लेखनीय वृद्धि शामिल है। चौहान ने राजनीतिक संदर्भ में भी किसान‑केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य किसानों को सशक्त करने पर है, चाहे वह पंजाब, केरल या कोई अन्य राज्य सरकार के काम का मूल्यांकन किसानों की आय, उत्पादन और सुरक्षा के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक आरोप‑प्रत्यारोप के आधार पर।
पंजाब के सांसद द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में चौहान ने श्री अन्न (मिलेट्स) को भारत की प्राचीन कृषि परंपरा का हिस्सा बताया है। उन्होंने सदन को बताया कि 2015 से 2025 के बीच पंजाब में 45 मिलेट्स किस्में (ज्वार, बाजरा और लिटिल मिलेट) जारी की गई हैं और इन्हें बठिंडा, फाजिल्का, मानसा, मोगा, रूपनगर, संगरूर आदि जिलों में उगाया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्षों में ज्वार, बाजरा, रागी की एमएसपी में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है और 2024‑25 के दौरान 11 लाख टन से अधिक श्री अन्न की सरकारी खरीद की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी