रुपये की कीमत में ऐतिहासिक गिरावट, डॉलर के मुकाबले 95 रुपये के करीब पहुंची भारतीय मुद्रा

युगवार्ता    27-Mar-2026
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प्रतीकात्मक


नई दिल्ली, 27 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण भारतीय मुद्रा रुपया की कीमत पर लगातार दबाव बना हुआ है। आज डॉलर की तुलना में भारतीय मुद्रा रिकॉर्ड 94.85 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक गिर गई। हालांकि कारोबार के अंत में डॉलर की मांग में मामूली कमी आने के कारण भारतीय मुद्रा 85 पैसे की कमजोरी के साथ 94.81 रुपये प्रति डॉलर (अनंतिम) के स्तर पर बंद हुई। इसके पहले पिछले कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय मुद्रा 93.96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुई थी।

रुपये ने आज के कारोबार की शुरुआत भी गिरावट के साथ ही की थी। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में भारतीय मुद्रा ने आज सुबह डॉलर के मुकाबले 19 पैसे की कमजोरी के साथ पहली बार 94 रुपये के स्तर को पार कर 94.15 रुपये के स्तर से कारोबार की शुरुआत की थी। बाजार खुलने के बाद रुपये की कीमत लगातार गिरती चली गई, जिसके कारण आज का कारोबार खत्म होने के थोड़ी देर बाद रुपया अभी तक सबसे निचले स्तर 94.85 के स्तर तक गिर गया। हालांकि बाद में भारतीय मुद्रा मामूली रिकवरी कर 94.84 रुपये प्रति डॉलर (अनंतिम) के स्तर पर बंद हुई।

मुद्रा बाजार के आज के कारोबार में रुपये ने डॉलर के साथ ही ब्रिटिश पौंड (जीबीपी) और यूरो के मुकाबले भी कमजोर प्रदर्शन किया। आज के कारोबार के बाद ब्रिटिश पौंड (जीबीपी) की तुलना में रुपया 63.96 पैसे की कमजोरी के साथ 126.12 (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह यूरो की तुलना में रुपया आज 16.88 पैसे की गिरावट के साथ 109.20 (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच कर बंद हुआ।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपये की गिरावट के लिए पश्चिम एशिया में जारी जंग सबसे बड़ी वजह है। अमेरिका और इजरायल तथा ईरान के बीच जारी जंग के कारण दुनिया भर में एनर्जी सप्लाई क्राइसिस की स्थिति बन गई है। ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की अपनी जरूरत के लिए आयात निर्भर करने वाले भारत जैसे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव काफी अधिक बढ़ गया है। इसके साथ ही इस जंग के कारण ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाली माल वाहक जहाजों की आवाजाही रोक देने की वजह से आयातित सामानों पर लगने वाला ट्रांसपोर्टेशन चार्ज भी काफी बढ़ गया है।

खुराना सिक्योरिटीज एंड फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ रवि चंदर खुराना का कहना है कि डॉलर के जरिए ज्यादातर इंपोर्ट होने की वजह से डॉलर की मांग में भी काफी तेजी आ गई है, जिससे डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है। इसी तरह विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली कर अपना पैसा निकालने के कारण भी डॉलर की मांग में काफी तेजी आ गई है। इस वजह से भी रुपये पर दबाव बढ़ गया है।

खुराना के अनुसार पश्चिम एशिया युद्ध अगर जल्दी नहीं थमा तो भारत जैसे देश के इंपोर्ट बिल में काफी इजाफा हो सकता है, जिसका सीधा असर देश के अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इसके साथ ही भारतीय मुद्रा रुपये की भी कमजोरी बढ़ती जाएगी। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये की कीमत में अभी तक 3.5 प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है। डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा लगभग 95 रुपये के करीब तक गिर चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है, जिससे ग्लोबल इक्विटी पर दबाव पड़ रहा है और बॉन्ड यील्ड बढ़ गई है, जिसका असर रुपये की घटती कीमत के रूप में भी नजर आ रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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