बंगाल चुनाव से पहले भाजपा के 40 पृष्ठ के आरोप पत्र में घुसपैठ, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था को लेकर तृणमूल पर गंभीर आरोप

युगवार्ता    28-Mar-2026
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अमित शाह


कोलकाता, 28 मार्च (हि.स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ 40 पृष्ठ का विस्तृत आरोप पत्र जारी किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस दस्तावेज को जारी करते हुए दावा किया कि यह तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के कुशासन का पूरा लेखा-जोखा है। भाजपा ने इस आरोप पत्र को “तृणमूल के 15 वर्षों का कुशासन और रक्तरंजित पश्चिम बंगाल का अभिशप्त अध्याय” नाम दिया है। इसमें राज्य की सुरक्षा व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा, आर्थिक स्थिति, औद्योगिक विकास में गिरावट और सामाजिक ढांचे के कमजोर होने जैसे कई मुद्दों को उठाया गया है।

घुसपैठ को बताया बड़ा मुद्दा: आरोप पत्र में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल अवैध घुसपैठ के लिए सुरक्षित क्षेत्र बन गया है। भाजपा ने आरोप लगाया कि घुसपैठ के कारण ही मवेशी तस्करी और जाली नोट जैसे अपराध बढ़े हैं। पार्टी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस केवल अपने वोट बैंक को मजबूत रखने के लिए इन मामलों में नरमी बरत रही है। इस मुद्दे पर जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल तभी घुसपैठ रोक सकता है, जब सीमा पर बाड़ लगाने के लिए राज्य सरकार जमीन उपलब्ध कराए। उन्होंने दावा किया कि करीब 600 किलोमीटर क्षेत्र में अभी तक बाड़ नहीं लग पाई क्योंकि राज्य सरकार ने जमीन नहीं दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कई बार इस विषय पर राज्य सरकार से संपर्क किया, लेकिन कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर राज्य में उनकी पार्टी की सरकार बनती है तो सीमाओं पर बाड़ लगाने के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध कराई जाएगी और घुसपैठ पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी। कई घोटालों में तृणमूल पर आरोप: भाजपा ने आरोप पत्र में तृणमूल कांग्रेस पर कई बड़े भ्रष्टाचार मामलों में संलिप्त होने का आरोप लगाया है। इसमें कोयला तस्करी, राशन वितरण घोटाला, स्कूल सेवा आयोग भर्ती विवाद, मनरेगा कार्यों में कथित अनियमितताएं, लॉटरी घोटाला, मध्याह्न भोजन योजना में गड़बड़ी, चिटफंड घोटाले, ग्रामीण सड़क योजना में अनियमितता और सीमा क्षेत्रों में मवेशी तस्करी जैसे मामलों का जिक्र किया गया है। भाजपा का दावा है कि भ्रष्टाचार का यह जाल निचले स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक फैला हुआ है। सरकारी कर्मचारियों और प्रशासन को लेकर भी आरोप: आरोप पत्र में यह भी कहा गया है कि राज्य में महंगाई भत्ता और सातवें वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों की मांगों को नजरअंदाज किया गया है। भाजपा ने दावा किया कि राज्य सरकार की उदासीनता के कारण कर्मचारी आर्थिक और मानसिक दबाव में काम करने को मजबूर हैं। भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य में कानून का शासन कमजोर हो गया है और प्रशासनिक व्यवस्था पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ गया है। आरोप पत्र में यह भी कहा गया है कि राज्य पुलिस निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर पा रही और प्रशासनिक अराजकता का माहौल बना हुआ है। लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर करने का आरोप: भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा की कार्यप्रणाली में विपक्ष को पर्याप्त स्थान नहीं दिया जा रहा। आरोप पत्र में कहा गया है कि विधानसभा की विभिन्न समितियों में विपक्ष को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। मतदाता सूची संशोधन के मुद्दे पर भी तृणमूल कांग्रेस पर प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है। महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया आरोप पत्र में राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसमें आर जी कर अस्पताल प्रकरण, संदेशखाली विवाद, पार्क स्ट्रीट घटना, कामदुनी और हांसखाली जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा मानव तस्करी, सिंडिकेट तंत्र, चाय बागान मजदूरों की स्थिति, स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था में गिरावट तथा जनसंख्या संतुलन में बदलाव जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया गया है। भाजपा ने दावा किया कि यह आरोप पत्र राज्य की मौजूदा स्थिति को सामने लाने और जनता को वास्तविक हालात बताने के उद्देश्य से जारी किया गया है।----------------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

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