
तेहरान, 28 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया में पिछले 29 दिनों से जारी युद्ध के बीच ईरान ने दावा किया है कि उसके परमाणु ठिकानों पर हमला किया गया है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब इजराइल ने तेहरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को “और बढ़ाने और फैलाने” की चेतावनी दी थी।
अमेरिकी लोक प्रसारक पीबीएस ने ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से बताया कि शुक्रवार को एक हेवी-वॉटर प्लांट और एक येलोकेक उत्पादन संयंत्र को निशाना बनाया गया। येलोकेक यूरेनियम का एक परिष्कृत रूप होता है, जिसे परमाणु ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जबकि हेवी-वॉटर का उपयोग परमाणु रिएक्टरों में मॉडरेटर के रूप में किया जाता है।
इन हमलों की खबर ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत अच्छी चल रही है। उन्होंने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए समय भी दिया था।
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्री संघर्ष-विराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इस प्रस्ताव में होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण छोड़ने की शर्त भी शामिल थी। ईरान ने साफ किया है कि वह किसी भी तरह की बातचीत में शामिल नहीं है और उसने क्षेत्र में अपने सैन्य बलों की संख्या बढ़ाने का आदेश दिया है। हाेर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, जहां से दुनिया के लगभग 20% तेल का परिवहन होता है। इसके बंद होने या बाधित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।
इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने पुन: चेतावनी दी थी कि यदि ईरान 6 अप्रैल तक इस जलमार्ग को सभी जहाजों के लिए नहीं खोलता है तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बना सकता है।
इस बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखने लगा है। शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले और इजराइल की आक्रामक चेतावनी ने पश्चिम एशिया के संकट को और गंभीर बना दिया है। कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर आर्थिक और सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी